देवी की कृपा होते हैं कष्ट दूर


देवी के 9 स्वरूपों में मां का दूसरा स्वरूप अमोघ फलदायी होता है..

देवी की कृपा होते हैं कष्ट दूर


 

नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की जाती है अपने इस स्वरूप में देवी भक्तों पर विशेष कृपा करती हैं और भक्तों के कष्टों को दूर करतीं हैं। देवी 9 स्वरूपों मां का दूसरा स्वरूप अमोघ फलदायी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रों के दौरान सच्चे दिल से की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती है। ब्रह्मचारिणी नाम में ब्रह्म का मतलब होता है तपस्या और चारिणी मतलब होता है आचरण करने वाली। मां के इस स्वरूप का स्मरण करने से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम में वृद्धि होती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा भी कहा जाता है कि जो साधक विधि विधान से देवी के इस रुप की पूजा-अर्चना करतें हैं उसकी कुंडलिनी शक्ति जाग्रत हो जाती है और उन्हें ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति होती है। सन्यासी और साधु लोग परम ज्ञान की प्राप्ति के लिए मां के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा अर्चना करते हैं। इतना ही नहीं देवी की उपसाना से मनुष्य कई कष्ट दूर हो जाते हैं और वह लंबी उम्र प्राप्त करता है।

मां ब्रह्मचारिणी का आर्शीवाद पाने के लिए इस मंत्र का 108 बार जप करें।

दधानां करपद्याभ्यामक्षमालाकमण्डल।

देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्माचारिण्यनुत्तमा।

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