आज करें मां चंद्रघंटा की उपासना


देवी अपने तीसरे स्वरूप में राक्षसों का वध करती है..

आज करें मां चंद्रघंटा की उपासना


 

नवरात्रि के तीसरे दिन देवी के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है। देवी अपने तीसरे स्वरूप में राक्षसों का वध करती है। ऐसी मान्यता है कि वह अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर करती हैं मां चंद्रघंटा की उत्पत्ति धर्म की रक्षा और संसार की अंधकार से रक्षा करने के लिए हुई है। मां चंद्रघंटा की उपासना करने से साधक में आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति का विकास होता है।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप बेहद शांत है। मां चंद्रघंटा का शरीर स्वर्ण के तरह चमकीला है। मां अपने हाथों में कमल और कमडंल लिए हुए हैं। उनके माथे पर आधा चांद्रमा विराजमान है। माथे पर अधे चांद की वजह से ही इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का वाहन सिंह है अपने इस स्वरूप में वे दुष्टों का विनाश करतीं हैं। मां को लाल श्रृंगार पसंद है। लाल फूल और लाल रंग के वस्त्र चढ़ाने से देवी अति प्रसन्न होकर अपने भक्तों को अभयदान देती है।

 

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