गांधी मंडेला पुरस्कार के लिए नामांकित श्रीलंका के पहले प्रधानमंत्री


श्रीलंका के पहले प्रधानमंत्री डॉन स्टीफन सेनानायके को गांधी मंडेला पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है..

गांधी मंडेला पुरस्कार के लिए नामांकित श्रीलंका के पहले प्रधानमंत्री


 

श्रीलंका के पहले प्रधानमंत्री डॉन स्टेफन सेनानायके को गांधी मंडेला पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है। सेनानायके एक उद्यमी और परोपकारी व्यक्ति थे। वह एक सफल ग्रेफाइट खान के मालिक भी थे। समाज सेवा के कारण ही उन्हें ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन द्वारा समाज सेवा के लिए मुदलियार की उपाधि दी गई थी। सेनानायके को "राष्ट्रपिता" माना जाता है। डॉन स्टेफन सेनानायके श्रीलंका के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होनें श्रीलंका में स्व-शासन की स्थापना के लिए अथक प्रयास किया। श्रीलंका में वे स्वतंत्रता आंदोलन के नेता के रूप में सामने आए और बाद में उनके आंदोलन के कारण ही श्रीलंका में स्व-शासन की स्थापना हुई। सेनानायके सिलोन की विधान परिषद के लिए भी चुने गए और उसके बाद स्टेट काउंसिल ऑफ सीलोन के लिए चुने गए, जहाँ उन्होंने कृषि और भूमि मंत्री के रूप में अपना कार्यभाल संभाला। सेनानायके सीलोन की पहली संसद के लिए चुने गए थे जो सरकार बनाने और सीलोन के पहले प्रधानमंत्री के रूप में 1947 से 1952 तक अपनी मृत्यु तक सेवा करते रहे।

Interactive Forum On Indian Economy और गांधी मंडेला फाउंडेशन के महासचिव श्री नंदन झा ने ‘गांधी मंडेला अवॉर्ड के इस अनोखे मंच की शुरुआत की है। इस पुरुस्कार के लिए उम्मीदवारों का चयन अनुकरणीय समिति द्वारा किया जाएगा। जिसमें भारत, नेपाल और बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और मानवाधिकार आयोग पूर्व अध्यक्ष शामिल होंगे। यह दक्षिण-मध्य एशिया के तीन राष्ट्रों के मुख्य न्यायाधीशों जिसमें भारत से श्री दीपक मिश्रा, श्री के. जी. बालाकृष्णन व नेपाल से श्री केदार नाथ उपाध्याय, इस्लाम एम.डी. तफ़ज़्ज़ुल इस्लाम, बांग्लादेश की एक अतुलनीय, सर्वमान्य और सक्षम चयन समिति होगी जो गांधी-मंडेला पुरस्कार की महत्ता को प्रमाणित करती है। इसके पहले ही आयोजन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों समेत 30 देशों के प्रतिनिधियों के नामांकनों का सम्मिलित होना इस पुरस्कार के अंतरराष्ट्रीय स्वरुप और अहमियत को दर्शाता है।

 

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