पंचायत प्रधान की अज्ञानता में उलझी गरीबी


केंद्र और राज्य सरकार द्वारा गरीबी दूर करने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। लेकिन धरातल पर उसका असर नहीं दिख रहा है। हिमाचल प्रदेश में गरीबों की गरीबी दूर नहीं हो रही है।

पंचायत प्रधान की अज्ञानता में उलझी गरीबी


केंद्र और राज्य सरकार द्वारा गरीबी दूर करने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। लेकिन धरातल पर उसका असर नहीं दिख रहा है। हिमाचल प्रदेश में गरीबों की गरीबी दूर नहीं हो रही है।

प्रदेश में कुल 3226 पंचायते हैं। जिनमें से केवल 26 पंचायतों ने घोषणा की है कि उनके यहाँ कोई गरीब नहीं है। हालात ये हैं कि 30 वर्षों से गरीबी घटने के बजाय बढ़ ही रही है। गरीबी दूर करने कि ज़िम्मेदारी पंचायत के प्रधानों और अन्य पदाधिकारी की है। उन्होंने गरीबी दूर तो की लेकिन जनता की नहीं अपनी और अपने चहेतों की।

वे अपने चहेतों को रेवाड़ी बांटते रहे। झूठे प्रमाण पत्रों के आधार पर कई लोग गरीब बन कर असल में जो गरीब है उनका हक मार रहे हैं। कई गरीब जो सच में गरीब है वे गरीबी रेखा के सूचि से ही बाहर रहे जिसके कारण उन्हें कोई लाभ भी नहीं मिल पाया।

हज़ारों गरीब BPL परिवार दस से पंद्रह वर्षों से इंतज़ार कर रहे हैं कि कब उनकी किस्मत खुलेगी। जिन गरीब को BPL सूचि से बाहर किया जा रहा है उन पर ये तर्क दिया जा रहा है कि वे काफी समय से BPL सूचि में हैं। इसलिए उनकी गरीबी अब तक दूर हो जानी चाहिए। कई BPL परिवार सरकारी योजना का लाभ लेने के बाद भी गरीब हैं।

नियम कहता है कि जिस BPL परिवार ने सस्ता राशन छोड़कर आर्थिक अनुदान ले लिया हो उस परिवार को BPL सूचि से बाहर हो जाना चाहिए। पंचायतों के पास इसका डाटा नहीं है कि BPL परिवार ने किन योजनाओं का लाभ उठाया है। इसलिए ऐसे परिवारों को हटाने की प्रक्रिया नहीं शुरू हो पा रही है। कई पंचायत प्रतिनिधि को ये भी नहीं मालूम है कि गरीबी दूर करने के लिए कौन सी योजनाएं चलायी जा रही हैं।

गरीबों के लिए योजना-

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास के लिए डेढ़ लाख रुपया। मकान की मरम्मत के लिए प्रति परिवार 25 हज़ार रुपया। गरीबों के समूह के लिए 3-5 लाख रुपया वार्षिक मदद। बीज, खाद, पौधे व उपकरणों में उपदान। अंत्योदय अन्न योजना में दो रूपये किलो गेहूं और तीन रूपये किलो चावल। पानी के टैंक के लिए आर्थिक मदद। बकरी,पशुपालन और मधुमक्खी पालन पर अनुदान।