किसानों ने पराली प्रबंधन को लेकर केंद्रीय टीम से की शिकायत


केंद्र सरकार ने उत्तर भारत को पराली के धुएं से बचाने के लिए पंजाब सरकार को पराली प्रबंधन के तहत बड़ी राशि दी है।

किसानों ने पराली प्रबंधन को लेकर केंद्रीय टीम से की शिकायत


केंद्र सरकार ने उत्तर भारत को पराली के धुएं से बचाने के लिए पंजाब सरकार को पराली प्रबंधन के तहत बड़ी राशि दी है। इससे किसानों को पराली प्रबंधन की मशीनें उपलब्ध कराइ जाएंगी। साथ ही जागरूकता अभियान चलाया जायेगा।

केंद्र ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक टीम को लुधियाना ये जानने के लिए भेजा की पंजाब सरकार पराली प्रबंधन को लेकर ज़मीनी स्तर पर क्या कार्य कर रही है।

टीम छोटी लुधियाना के साहनेवाल पहुंची। वहां उन्होंने धन की कटाई के लिए सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के काम करने के तरीको को देखा। वहां के किसानों ने पराली प्रबंधन की मशीनें देरी से मिलने की शिकायत भी की।

कई किसानों ने ये भी समस्या बताई की उनके पास कम हॉर्स पावर का ट्रैक्टर होने के कारण हैप्पी सीडर मशीन सही नहीं बैठती।

किसानों ने ये भी जानकारी दी की अगर वे हैप्पी सीडर मशीन से फसल से बिजाई करते है तो कितनी पैदावार होगी। उसके बाद टीम कृषि विज्ञान केंद्र समराला गई। वहां के एसोसिएट डायरेक्टर प्रो. एससी शर्मा ने उन्हें क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट की मशीनरी दिखाई।

टीम उसके बाद लुधियाना के जसपाल बांगर गयी। यहाँ के किसानों ने पराली प्रबंधन के तहत हैप्पी सीडर से गेहूं की बिजाई की थी। किसानों ने इसके बारे में बताया कि उन्होंने पीएयू सुपर एसएमएस वाली कम्बाइन के साथ ही धान कि कटाई करवाई। इससे पराली छोटे-छोटे टुकड़े में बट गई।

इसके बाद वे गेहूं की बुआई हैप्पी सीडर या स्पेशल नो टिल ड्रिल मशीन से करेंगे। किसानों ने बताया की इससे गेहूं की बुआई में उतना खर्च तो नहीं आता है लेकिन जब पराली को खेत में मिलकर आलू तैयार करते है तो खर्च बढ़ जाता है।

मंत्रालय को सौंपी जायेगा रिपोर्ट-

एमओईफ के मिडिया अफसर हिमांक ने कहा कि उन्हें पर्यावरण मंत्री ने भेजा था। वे ये देखने आये थे कि स्थानीय सरकार पराली प्रबंधन को लेकर क्या कदम उठा रही है और किसानों की क्या समस्या आ रही है। हिमांक ने कहा की पराली जलाने की समस्या बेहद गंभीर है। इससे पंजाब, हरियाणा, यूपी और दिल्ली तक के लोग प्रभावित होते हैं।