अब ऐसे होगी ज़हरीले कीटनाशकों से किसानों की सुरक्षा!


फ़सल की सुरक्षा के लिए किसान खेत में रसायनों का छिड़काव करते हुए कोई सुरक्षात्मक तरीका नहीं अपनाते हैं। इस कारण वे ज़हरीले पदार्थों के संपर्क में आते हैं। अब भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सुरक्षात्मक जेल तैयार किया है, जो कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से किसानों को बचाने में मददगार साबित हो सकता है। जानिए जेल की ख़ासियत

अब ऐसे होगी ज़हरीले कीटनाशकों से किसानों की सुरक्षा!


फ़सल की सुरक्षा के लिए किसान खेत में रसायनों का छिड़काव करते हुए कोई सुरक्षात्मक तरीका नहीं अपनाते हैं। इस कारण वे ज़हरीले पदार्थों के संपर्क में आते हैं। अब भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सुरक्षात्मक जेल तैयार किया है, जो कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से किसानों को बचाने में मददगार साबित हो सकता है।

क्या है ये जेल-

पॉली-ऑक्सिम नाम के इस जेल को त्वचा पर लगाते हैं, जो कीटनाशकों और फफूंदनाशी दवाओं में मौजूद ज़हरीले रसायनों और खतरनाक ऑर्गो फॉस्फोरस यौगिक को नष्ट कर सकता है। इस तरह हानिकारक रसायनों का दुष्प्रभाव मस्तिष्क और फे़फ़ड़ों में गहराई तक नहीं पहुंच पाता।

शोध टीम के एक वरिष्ठ सदस्य डॉ. प्रवीण कुमार वेमुला बताते हैं, "फिलहाल हम जानवरों पर सुरक्षा से जुड़े व्यापक अध्ययन कर रहे हैं, जो चार महीने में पूरा हो जाएगा। इसके बाद मनुष्यों में इस जेल के प्रभाव को दर्शाने के लिए हम एक प्रारंभिक अध्ययन की योजना बना रहे हैं।"

कैसे है लाभदायक-

कीटनाशकों में मौजूद रसायनों के संपर्क में आने से तंत्रिका तंत्र में मौजूद असिटल्कोलिनेस्टरेस (AChE) एंजाइम प्रभावित होता है। यह एंजाइम न्यूरोमस्क्यूलर कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बता दें इस जैल को चूहों पर लगाने के बाद जब उन्हें घातक एमपीटी कीटनाशक के संपर्क में छोड़ा गया तो उनके शरीर में मौजूद AChE एंजाइम के स्तर में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे वैज्ञानिकों को यकीन हो गया कि यह जैल त्वचा के ज़रिये शरीर में कीटनाशकों के प्रवेश को रोक सकता है।

दरअसल भारत में करीब 250 तरह के कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें 18 सबसे घातक हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2015 में 7062 लोगों की मौत कीटनाशकों से हुई थी। सीएसई के मुताबिक, भारत में औसतन कीटनाशकों से जुड़े 10 हज़ार मामले हर साल सामने आते हैं।

किसने किया निर्माण-

इस जेल को बंगलुरु में इंस्टीट्यूट फॉर स्टेम सेल बायोलॉजी ऐंड रीजनरेटिव मेडिसिन (इनस्टेम) के शोधकर्ताओं ने न्यूक्लियोफिलिक पॉलिमर से बनाया है। वैज्ञानिकों ने अध्ययन के दौरान पाया कि पॉली-ऑक्सीम जेल से उपचारित चूहों पर कीटनाशकों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। जिन चूहों पर जेल का उपयोग नहीं किया गया था, उन पर ज़हर का दुष्प्रभाव देखा गया।

ये जेल कामकाज में शारीरिक बाधा नहीं पहुंचाता और ऑर्गेनोफॉस्फेट को निष्क्रिय करने के लिए प्रमुख घटक के रूप में कार्य करता है। लंबे समय तक पराबैंगनी प्रकाश के संपर्क में रहने और 20-40 डिग्री तापमान के बावजूद ऑक्सीम कई ऑर्गेनोफॉस्फेट अणुओं को एक के बाद एक हाइड्रोलाइज करके तोड़ सकता है।

 



 

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