मत्स्य पालन के लिए 7500 करोड़ रूपये दिए कैबिनेट ने


कृषि क्षेत्र में नए रोज़गार के लिए मत्स्य पालन क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के विकास पर 7500 करोड़ रूपये से अधिक की धन राशि खर्च की जाएगी।

मत्स्य पालन के लिए 7500 करोड़ रूपये दिए कैबिनेट ने


कृषि क्षेत्र में नए रोज़गार के लिए मत्स्य पालन क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के विकास पर 7500 करोड़ रूपये से अधिक की धन राशि खर्च की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बैठक में एफआईडीएफ को मंज़ूरी दी है।

इस फै़सले से वर्ष 2022-23 तक सालाना दो करोड़ टन मछली का उत्पादन का लक्ष पूरा हो जाएगा। इससे 9.4 लाख नए रोज़गार उत्त्पन होंगे। देश में फिलहाल 1.2 टन मछली का उत्पादन हो रहा है। फिशरीज़ एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के लिए 7522 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

इस फंड के उपयोग से मतस्य पालन क्षेत्र का तेज़ी से विकास होगा। बता दें फंड में  5266 करोड़ रुपय रियायती कर्ज़ से मिलेंगे, जबकि 1316 करोड़ रूपये का निवेश लाभार्थी खुद करेंगे। फंड के लिए रियायती कर्ज़ नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड), नेशनल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और अन्य अनुसूचित बैंक से मिलेंगे।

मतस्य पालन के लिए गठित इस फंड से राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों, सहकारी संगठनों व्यक्तिगत उद्यमी को रियायती कर्ज़ मुहैया कराया जाएगा। इस मद के लिए 2018-19 से लेकर 2022-23 तक ऋण प्राप्ती की जाएगी।  इसकी आदायगी अगले 12 वर्षो में की जा सकती है। इसके तहत कर्ज़ पर अगले दो वर्षो तक कोई ब्याज़ नहीं लगेगा।

इसके साथ ही वसूली की भी बाध्यता नहीं होगी। मत्सय पालन के लिए गठित फंड का उपयोग समुद्री मछली पालन में भी किया जा सकता है। इसका उद्देश्य 2020 तक 1.30 करोड़ टन मछली का उत्पादन करना और नीली क्रांति को नए लक्ष तक ले जाना है। सरकार मछली उत्पादाद को बढ़ाकर आठ से नौ फीसदी तक पहुंचाना चाहती है।