क्यों भारत में नहीं होती हींग की खेती?


दुनिया में सबसे ज़्यादा हींग भारत में इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन ताज्जुब की बात यह है की ये भारत में पैदा ही नहीं किया जाता है। दुनियाभर में पैदा किया हुआ हींग 40% भारत में इस्तेमाल किया जाता है।

क्यों भारत में नहीं होती हींग की खेती?


दुनिया में सबसे अधिक हींग भारत में इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन ताज्जुब की बात यह है की हींग भारत में पैदा ही नहीं होता है। दरअसल दुनियाभर में पैदा किया गया हींग 40% भारत में इस्तेमाल किया जाता है। 

यही वजह है कि हींग के आयात के लिए हर साल करोड़ों रुपए खर्च करना पड़ता है। अभी तक न ही किसी सरकार ने और न ही किसी कृषि विश्वविद्यालय ने हींग के उत्पादन की शुरूआत करने की सोची। भारत के किसानों को नया विकल्प देने के लिए कॉफी बोर्ड के सदस्य डॉक्टर विक्रम शर्मा ने अपनी ओर से पहल की है। आपको बता दें शर्मा को ना तो किसी सरकारी संगठन से सहयोग मिल रहा है और ना ही किसी गैर सरकारी संगठन से। 

डॉक्टर शर्मा ने बताया कि बाज़ार में शुद्ध हींग की कीमत 35 हज़ार रुपये प्रति किलो है और अगर भारतीय किसान इसे पैदा करता है तो एक अच्छे बिजनेसमैन की तरह मुनाफ़ा कर सकता है। इससे किसानों का कायाकल्प हो सकता है। भारत में हींग की मांग बहुत अधिक है और उत्पादन ज़ीरो। इससे पहले भी 2012 में डॉक्टर शर्मा ने जम्मू और कश्मीर में हींग की खेती करने की कोशिश की लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाए।

हींग का पौधा शून्य से 35 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को सहन कर सकता है। जिसके लिए भारत के पहाड़ी राज्य जैसे जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल इत्यादि उपयुक्त रहेंगे। लेकिन डॉक्टर शर्मा का कहना है कि यहां के किसान आज भी पारंपरिक खेती कर रहे हैं। जिसे जंगली जानवर बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसा हींग के साथ नहीं है। हींग की खेती में कोई भी जानवर फ़सल को नुकसान नहीं पहुंचाता जिससे किसानों को खेती का पूरा फायदा मिलेगा।

सबसे मुश्किल काम है हींग का बीज हासिल करना। हींग आमतौर पर अफगानिस्तान, ईरान, इराक, तुर्किस्तान और बलूचिस्तान में उगाया जाता है। वहां के कानून के अनुसार किसी भी विदेशी को हींग का बीज बेचने पर मौत की सज़ा सुनाई जा सकती है।