फ़ूलों की खेती से रौशन हुआ कश्मीर


जो फ़ूल कश्मीर में है वो और कहीं नहीं हैं इसीलिए कश्मीर के फूलों की मांग भी सबसे अधिक है। बात करें कश्मीर के फ़ूलों की तो चाहे वो ट्यूलिप हो, गुलाब हो या कोई और उनकी अपनी अलग पहचान होती है।

फ़ूलों की खेती से रौशन हुआ कश्मीर


 

जो फूल कश्मीर में है वो और कहीं नहीं हैं इसीलिए कश्मीर के फूलों की मांग भी सबसे अधिक है। बात करें कश्मीर के फ़ूलों की तो चाहे वो ट्यूलिप हो, गुलाब हो या कोई और उनकी अपनी अलग पहचान होती है।

बता दें कश्मीर के किसानों के साथ-साथ वहां के लोगों ने भी अब कश्मीर में ही रोज़गार ढूंढ निकला है। हम बात कर रहें हैं फूलों की खेती की। दिलचस्प बात ये है कि कश्मीर के फूलों का हमेशा से लोगों के बीच आकर्षण रहा है।

आपक बता दें टयूलिप का फूल 50 से 70 और 100 रुपये तक की कीमत में बिक जाता है। इससे कश्मीरी किसानों को अधिक मुनाफ़ा होता है। इसलिए अब कश्मीर में पिछले कईं वर्षों से फूलों के व्यापार में ज़बरदस्त उछाल देखने को भी मिला है।

ये इसलिए क्योंकि अब फूलों का प्रयोग लगभग हर जगह हो रहा है। जैसे चाहे वह त्योहार हो, शादी हो या फिर राजनैतिक रैलियां फूलों का उपयोग हर जगह ज़रूरी हो गया है। साथ ही कश्मीर के फूलों का अब एक बड़ा बाज़ार भी बन गया है।

कई बड़ी-बड़ी कंपनियों ने कश्मीर के फूल उघोग पर अपनी रुचि दिखाई है और उनकी मदद से यहां फूलों के उत्पादन से लेकर बिक्री तक सब कुछ बड़े और सुगम पैमाने पर हो रहा है। राज्य का बागबानी विभाग भी लोगों को फूलों की खेती में नई तकनीकों से परिचित करा रही है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग कृषि से जुड़ें और इसे खूब बढ़ाएं।