ऑर्गेनिक खेती से चार गुने में बिकता गेहूं


पंजाब के मनसा ज़िले के जोइया गांव के अमरीक सिंह यु तो किसान हैं लेकिन परली न जलाने वाले किसानों के वे रोले मॉडल बन चुके है।

ऑर्गेनिक खेती से चार गुने में बिकता गेहूं


पंजाब के मनसा ज़िले के जोइया गांव के अमरीक सिंह युं तो किसान हैं लेकिन परली न जलाने वाले किसानों के वे रोले मॉडल बन चुके हैं। खेती विरासत मिशन से जुड़े अमरीक पराली को जलाए बिना खेतों से बेहतर उपज ही नहीं ले रहे हैं, बल्कि उनके ऑर्गनिक गेहूं की मांग बहुत है। खरीदार कई माह पहले उपज खरीद के लिए बुकिंग करवा लेते हैं। वो भी बाज़ार भाव से चार गुने ज़्यादा कीमत पर। पर्यावरण संरक्षण के काम करने वाले अमरीक दूसरे किसानों से भी पराली न जलाने की अपील करते हैं।

अमरीक सिंह पिछले दो सालों से पराली नहीं जलाते हैं। अन्य किसानों को ऑर्गनिक खेती से जुड़कर ज़हर मुक्त खेती करने के बारे में जागरूक भी कर रहे हैं। राज्य के प्रगतिशील किसान ओर खेती विरासत मिशन के ज़िला अध्यक्ष अमरीक करीब दो साल से अपने खेतों में धन की पराली नहीं जला रहे हैं। रोटावेटर के ज़रिए धान की बुआई की जा रही है।

साथ ही ऑर्गेनिक खेती से अपनी 25 एकड़ में से 10 एकड़ ज़मीन पर विभिन्न फसलें उगाकर लोगों को केमिकल मुक्त खेती का सन्देश दे रहे हैं। उनका कहना है कि पराली जलाने से दूषित हो रहे वातावरण के मद्देज़र वह खेती विरासत मिशन से जुड़े। अमरीक के मुताबिक, किसान के लिए खेती विरासत मिशन में सभी जानकारियां हैं। जो आम किसानों तक नहीं पहुंच रही। मिशन से जुड़ने के बाद पता चला कि केमिकल मुक्त खेती न करें। भले ही एक साल फसल का झार कम हो, लेकिन अगले साल फसल का झाड़ बढ़ जाएगा। उनकी फसल का भाव भी कई गुना अधिक मिल जाता है। साथ ही पर्यावरण भी दूषित नहीं होता। 

कीटनाशकों से पाया छुटकारा- 
अमरीक का कहना है कि पंजाब में कीटनाशक अधिक हैं। इस ज़हर का असर काफी समय तक रहता है। इसलिए उन्होंने ऑर्गेनिक खेती को चुना। इसमें ऑर्गेनिक खेती से गेहूं की पैदावार की। इस तकनीक से खेतों में किसी प्रकार की कीटनाशक की ज़रुरत नहीं होती है।