अमरुद की खेती करने की विधि जानें


अमरूद के पौधे लगाने का मुख्य समय जुलाई से अगस्त तक है लेकिन जिन स्थानों में सिंचाई की सुविधा हो वहां पर पौधे फरवरी-मार्च में भी लगाये जा सकते हैं।

अमरुद की खेती करने की विधि जानें


अमरूद के पौधे लगाने का मुख्य समय जुलाई से अगस्त तक है लेकिन जिन स्थानों में सिंचाई की सुविधा हो वहां पर पौधे फरवरी-मार्च में भी लगाये जा सकते हैं। बाग लगाने के लिये खेत को समतल कर लेना चाहिये। इसके पश्चात पौधे लगाने के लिये निश्चित दूरी पर 60 & 60 & 60 से.मी. (लम्बा, चौड़ा, गहरा) आकार के गड्ढे तैयार कर लेने चाहिये।

इन गड्ढों में 15-20 कि.ग्रा. अच्छी सड़ी हुई गोबर खाद, 500 ग्राम सुपर फास्फेट, 250 ग्राम पोटाश तथा 25 ग्राम एल्ड्रेक्स चूर्ण को अच्छी तरह से मिट्टी में मिलाकर पौधे लगाने के 15-20 दिन पहले भर देना चाहिये।

बाग में पौधे लगाने की दूरी मृदा की उर्वरता, किस्म विशेष एवं जलवायु पर निर्भर करती है। बीजू पौधों को कलमी पौधे से ज्यादा जगह की आवश्यकता होती है। इस प्रकार कम उपजाऊ भूमि में 4 & 4 मी., 8 & 8 मीटर की दूरी पर पौधे लगाने की सिफारिश की जाती है।

बरसात की फसल के फल जल्दी पक जाते हैं तथा उत्तम गुण वाले नहीं होते हैं। इस फसल में कीट एवं रोगों का प्रकोप भी अधिक होता है जबकि जाड़े की फसल के फल उत्तम गुण वाले होते हैं तथा फलों में विटामिन – सी की मात्रा सबसे अधिक पाई जाती है। बरसात की फसल में विटामिन-सी की मात्रा ठंड की फसल से लगभग आधी पाई जाती है। साथ ही वर्षात की फसल को बाज़ार में अच्छा मूल्य नहीं मिल पाता है। अत: ठंड की फसल लेने की सिफारिश की जाती है। बरसात की फसल को रोकने के लिये एवं ठंड की फसल लेने के लिये निम्नलिखित उपाय करने चाहिये-

1 फरवरी से जून तक पौधों को पानी नहीं देना चाहिये। पानी रोकने की यह क्रिया 4 वर्ष से अधिक उम्र के पौधों में ही करनी चाहिये जिससे बसंत ऋतु में आये फूल गिर जाते हैं तथा वर्षात में फूल काफी संख्या में आते हैं।

110 प्रतिशत यूरिया के घोल का छिड़काव मार्च या अप्रैल में करने से बसंत ऋतु में आये फूल एवं पत्तियां झड़ जाती हैं तथा मृग बहार (वर्षात के फूल) अच्छी आती हैं।

1 बसंत ऋतु के फूलों को गिराने के लिये 100-200 पी.पी.एम.नेफ्थलीन एसेटिक एसिड के घोल का छिड़काव फूलों के ऊपर 20 दिन के अंतराल में दो बार करने से सफलता पाई गई है।

उपज

तीन से चार वर्ष में फलना शुरू हो जाता है। 5 या 6 वर्ष में वृक्ष से अनुमानित 500-600 फल तथा 8 से 10 वर्ष शुरू से अनुमानत: 1000-2000 फल प्राप्त होते हैं।  



 

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