जितनी अच्छी मिट्टी, उतनी अच्छी फ़सल!


जहां एक तरफ कृषि के स्तर और तकनीक में बड़ा परिवर्तन आ गया है तो वहीं अब अत्याधुनिक बीज,मशीनरी और उन्नत उर्वरकों से बेहतर फ़सल की जाती है। अब बारी है मिट्टी की। जी हां, अब मिट्टी पर अलग-अलग तरह के शोध किए जा रहे हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि किस फ़सल के लिए कौन सी मिट्टी उपयोगी है और कौन सी नहीं।

जितनी अच्छी मिट्टी, उतनी अच्छी फ़सल!


जहां एक तरफ कृषि के स्तर और तकनीक में बड़ा परिवर्तन आ गया है तो वहीं अब अत्याधुनिक बीज,मशीनरी और उन्नत उर्वरकों से बेहतर फ़सल की जाती है। अब बारी है मिट्टी की। जी हां, अब मिट्टी पर अलग-अलग तरह के शोध किए जा रहे हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि किस फ़सल के लिए कौन सी मिट्टी उपयोगी है और कौन सी नहीं।

गांव में कृषि को ध्यान में रखकर मिट्टी का ख्याल रखा जाता है। मिट्टी का स्वस्थ होना ज़रूरी है क्योंकि यदि मिट्टी में खोट आ गया तो फ़सल अच्छी नहीं हो सकती। हैरानी की बात ये है कि दिल्ली में मैट्रो रेल की खुदाई के बाद जो मिट्टी निकली वह बहुत चमकदार, साफ़ और उपजाऊ थी।

उस मिट्टी को एक परिवार ने अपने गमलों में डाल दी और गमलों में सब्ज़ियों से लेकर फल तक सबके पेड़ और बीज लगाए। जल्द ही पौधे खूब बड़े हो गए। दो गमलों में लगाई गई हरी मिर्च खूब फल-फूल गई और उन दोनों गमलों से एक किलो मिर्च पैदा हुई। ऐसे ही टमाटर, आलू, नींबू दूसरे गमलों से भारी मात्रा में पैदा हुए। 

तो देखा कि मिट्टी के परिवर्तन से कितना लाभ होता है। इसलिए मिट्टी का बेहतर होना बहुत आवश्यक है क्योंकि मिट्टी के बेहतर होने का फ़सल पर बहुत प्रभाव रहता है। मिट्टी को उपजाऊ बनाने के के लिए खाद, कीटनाशक और तमाम तरह के उर्वरक उसमें प्रयोग किए जाते हैं। 

 

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