मसूर में लगने वाले रोग और उसके बचाव


मसूर की फसल में लगने वाले लगभग सभी कीट वही होते हैं जो रबी दलहन फसलों में लगते हैं। इसमें मुख्य रूप से कटवर्म, ऐफिड और मटर का फली छेदक अधिक हानि पहुंचाते हैं।

मसूर में लगने वाले रोग और उसके बचाव


मसूर की फसल में लगने वाले लगभग सभी कीट वही होते हैं जो रबी दलहन फसलों में लगते हैं। इसमें मुख्य रूप से कटवर्म, एफिड और मटर का फली छेदक अधिक हानि पहुंचाते हैं। इसकी रोकथाम मटर एवं चने खाने वाले गिडार को नष्ट करने के लिए मोनोक्रोटोफॉस 36 -ई.सी. 0.15% का 1 मि.ली. दवा को 1 लीटर पानी में घोल बनाकर/हेक्टेयर (800-1000 लीटर पानी) के हिसाब से छिड़काव करें।

रतुआ या गेरुई-

यह रोग यूरोमाइसिज फेबि नामक फफूंद द्वारा फैलाया जाता है। इसकी रोकथाम के लिए निम्न उपाय करें-

रोग रोधी किस्मे पंत एल.- 406 एवं एल.9-12 उगाएं।

फसल पर इस बीमारी का प्रकोप जनवरी से शुरु होकर अंत तक चलता है और मसूर में भारी नुकसान का कारण बन जाता है। इसकी पहचान पत्तियों एवं तनों पर गुलाबी व भूरे रंग के धब्बे पाए जाने पर की जा सकती है। तत्पश्चात पत्तियों और तनों पर काले धब्बे भी देखे जा सकते हैं। प्रकोप होने पर पौधा सूख जाता है।

फसल की कटाई के बाद अवशेष को जला देना चाहिए।

रोगरोधी किस्में जैसे डी.पी.एल.-62, एल.-15, नरेंद्र मसूर-1, पंत एल.-406, पंत एल.-639, पंत एल.-4 ही उगायें।

फसल पर 0.2 प्रतिशत मैंकोजेब 75 डब्ल्यू. पी. का 15 दिन के अंतराल पर दो बार छिड़काव करें।

उकठा-

यह रोग मसूर में उगने वाले सभी क्षेत्रों में पाया जाता है। इस रोग के प्रकोप से पौधे पीले पड़ जाते हैं और सूख भी जाते हैं। यह एक भूमि जनित रोग हैं। इसकी रोकथाम के लिए रोग रोधी किस्में उगायें।

उचित फसल चक्र अपनाए।

स्वस्थ बीज की बुवाई करें।

चूर्णिल आसिता

फसल बोने के लगभग 90 दिन बाद इस रोग के छोटे-छोटे धब्बे पत्तियों की निचली सतह या निचले भागों पर देखे जा सकते हैं, जो बाद में आकार में बढ़ते हैं तत्पश्चात दोनों सतह को पूरी तरह ढक लेते हैं।

रोकथाम

रोग ग्रसितपौधों को उखाड़ कर जला देना चाहिए।

3 की.ग्रा. सल्फेक्स1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

मृदुरोमिल आसिता

इस रोग की पहचान पत्तियों की ऊपरी सतह पर हल्के हरे पीले निश्चित आकार के धब्बे पाए जाते हैं।

रोकथाम

उचित फसल चक्र अपनाएं

एग्रोसीन जी.एन.- 0.2 प्रतिशत फफूंदनाशक के हिसाब से बीजोपचार करके बिजोद और निवेश द्रव्य नियंत्रित किया जा सकता है।