ज़िला परिषद के कार्य


पंचायती राज की सबसे ऊपरी संस्था ज़िला परिषद है। ज़िला परिषद ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों का मूलत: नीति निर्धारण एवं मार्गदर्षन का काम करती है।

ज़िला परिषद के कार्य


पंचायती राज की सबसे ऊपरी संस्था ज़िला परिषद है। ज़िला परिषद ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों का मूलत: नीति निर्धारण एवं मार्गदर्षन का काम करती है।

देखिए ज़िला परिषद के कार्य- 
1. मकृषि- कृषि उत्पादन को बढ़ाने के साधनों को प्रोत्साहित करना तथा उन्नत कृषि पध्दतियों के प्रयोग को लोकप्रिय बनाना, कृषि बीज फार्म तथा व्यवसायिक फार्म खोलना तथा उनका अनुरक्षण करना, कृषि एवं बागवानी प्रसार प्रशिक्षण केन्द्रों का प्रबंधन, किसानों का प्रशिक्षण, भूमि सुधार एवं भू-संरक्षण।
2. सिंचाई, भूतल जल संसाधन एवं जल संभर विकास- लघु सिंचाई कार्य एवं उद्वह सिंचाई का निर्माण/ जिला परिषद् के नियंत्रण में सिंचाई स्कीमों के अधीन जल का समय पर और समान रूप से वितरण और उसके पूर्ण उपयोग की व्यवस्था करना, भूतल जल संसाधनों का विकास, सामुदायिक पम्पसेट लगाना, जल संभर विकास कार्यक्रम।
3. बागवानी- ग्रामीण पार्क एवं उद्यान, फलों एवं सब्जियों की खेती/फार्म।
4. सांख्यिकी- पंचायत समिति और ज़िला परिषद के क्रियाकलापों से संबंधित सांख्यिकी ऑंकड़ों एवं अन्य सूचनाओं का प्रकाशन, समन्वय एवं उपयोग तथा पंचायत समिति और जिला परिषद को सुपुर्द परियोजनाओं और कार्यक्रमों का समय-समय पर पर्यवेक्षण एवं मूल्यांकन।
5. ग्रामीण विद्युतीकरण
6. आवश्यक वस्तुओं का वितरण
7. भूमि संरक्षण- भूमि संरक्षण के उपाय/ भूमि उध्दार और भूमि विकास संबंधी कार्य
8. विपणन- विनयमित बाजारों और बाजार प्रागंणों का विकास/ कृषि उत्पादनों का वर्गीकरण, गुण नियंत्रण।
9. सामाजिक वानिकी- वृक्षारोपाण के लिए अभियान चलाना/ वृक्षारोपण और उनका अनुरक्षण।
10. पशुपालन एवं गव्य विकास- पशु चिकित्सा अस्पतालों और औषधालयों की स्थापना/ चलन्त निदान और उपचार प्रयोगशालाओं की स्थापना/ गायों और सुअरों के प्रजनन प्रक्षेत्र/ कुक्कुट फार्म, बत्ताख फार्म और बकरी फार्म/  चारा विकास कार्यक्रम/ दुग्धशाला, कुक्कुट पालन एवं सुअर पालन को प्रोत्साहन/ महामारी तथा छूत रोगों की रोकथाम।
11.  मत्स्य पालन- मत्स्य बीज का उत्पादन एवं वितरण/ निजी और सामुदायिक तालाबों में मत्स्य पालन का विकास/ अन्तर्देशीय मत्स्य पालन का विकास/ मछली की रोग मुक्ति एवं सुखाना/ परम्परागत मछली पकड़ने के उद्योग को सहायता/ मत्स्य क्रय-विक्रय सहकारी समितियों का गठन, मछुआरों के उत्थान एवं विकास के लिए कल्याण योजनाएँ।
12. ग्रामीण सड़कें एवं अन्तर्देशीय जलमार्ग- राष्ट्रीय और राज्य पथों को छोड़कर अन्य सड़कों का निर्माण और अनुरक्षण/   जिला परिषद के कार्यालय भवनों का निर्माण एवं अनुरक्षण/ बाजारों शैक्षणिक संस्थाओं, / नई सड़कों और विधमान सड़कों को चौड़ा करने के लिए स्वैच्छिक भू-अर्पण के लिए लोगों को संगठित करना।
13. स्वास्थ्य एवं आरोग्य- प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और औषधालयों की स्थापना एवं अनुरक्षण/ रोग- प्रतिरक्षण और टीकाकरण कार्यक्रम का कार्यान्वयन/ स्वास्थ्य, शिक्षा संबंधी कार्यकलाप/ मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सम्बन्धी कार्यकलाप/ परिवार कल्याण संबंधी कार्य-कलाप/ पंचायत समिति और ग्राम पंचायत के साथ मिलकर स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन/ पर्यावरण प्रदूषण से बचाव के उपाय।
14. ग्रामीण आवास- गृह विहीन परिवारों की पहचान/ जिला में गृह निर्माण कार्यक्रमों का कार्यान्वयन/ अल्प लागत के गृह निर्माण को लोकप्रिय बनाने का कार्य।
15. शिक्षा- शैक्षणिक कार्यकलापों को प्रोत्साहन जिसके अन्तर्गत प्राथमिक एवं माध्यमिक विधालयों की स्थापना और अनुरक्षण भी शामिल है।  शैक्षणिक कार्यकलापों का सर्वेक्षण और मूल्यांकन/ सामान्य छात्रावासों, आश्रमों, विधालयों तथा अनाथालयों की स्थापना और अनुरक्षण।
16. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम- गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम की योजना बनाना, पर्यवेक्षण, अनुश्रवण और उनका कार्यान्वयन।
17. सामाजिक सुधार कार्यकलाप- महिला संगठन एवं कल्याण/ बाल संगठन एवं कल्याण/ स्थानीय आवारागर्दी से राहत/ अनाथालयों, उध्दार गृहों इत्यादि जैसे सामाजिक कल्याण संस्थाओं का अनुरक्षण/ विधवाओं, वृध्दों और विकलांग निस्सहायों के लिए पेंशन तथा बेरोजगारों एवं अन्तर्जातीय विवाह करनेवाले दम्पत्तिायों जिनमें से कोई एक अनूसूचित जाति या जनजाति का सदस्य हो के लिए भत्तो की मंजूरी एवं वितरण/ परम्परागत त्योहारों को नया रूप और सामाजिक आयाम देना। बचत आदतों को प्रोत्साहित करना। अल्प बचत आदतों को प्रोत्साहित करना। सूदखोरी एवं ग्राम्य ऋणग्रस्तता के विरूध्द संघर्ष।