फूलों की खेती से क्यों हो रहा है किसान को नुकसान?


हाइब्रिड गेंदे की फूल की खेती किसानों के लिए काफी नुकसानदय साबित होने लगी है। इसका कारण है मध्य प्रदेश में चुनावों के चलते आचार संहिता का लगना और पर्याप्त अनुदान राशि ना मिल पाना। जिसकी वजह से फूल बेचने वाले किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

फूलों की खेती से क्यों हो रहा है किसान को नुकसान?


हाइब्रिड गेंदे की फूल की खेती किसानों के लिए काफी नुकसानदय साबित होने लगी है। इसका कारण है मध्य प्रदेश में चुनावों के चलते आचार संहिता का लगना और पर्याप्त अनुदान राशि ना मिल पाना। जिसकी वजह से फूल बेचने वाले किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों को इस बात का डर सता रहा है कि त्यौहारी सीज़न में फूलों के दामों में रिकॉर्ड बढ़ोंतरी होने की उम्मीद है। इसके अलावा फूलों की बिक्री के लिए नवंबर का महीना काफी उपयुक्त माना जा रहा है।

फूलों की खेती करने वाले किसानों की मानें तो सीज़न के दौरान गत वर्ष गेंदा 40 से 50 रूपये किलों में बिक रहा था, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा हालात खराब हो गए है। इस बार ये 8 से 10 रूपये किलों तक ही मिल रहे हैं।दरअसल लोगों ने पिछली बार ज्यादा उत्पादन देखकर इस बार खुद ज्यादा फूल बोया है। जिसका प्रभाव उल्टा पड़ा है और फूल उत्पादन करने वाले किसानों के लाले पड़ गए है।

किसानों की मानें तो इस खेती में लाभ कम है और लागत अधिक है। एक बीघा में 20 हज़ार की दवाई, 6 हज़ार के बीज, तीन बार निंदाई के 12 हज़ार रूपए और 5 हज़ार रूपये की खाद लगती है। इसी प्रकार से 45 से 50 हज़ार प्रत्येक बीघा पर खर्च आता है।

बता दें पिछली के दाम ज्यादा अच्छे थे। लेकिन इस बार काफी ज्यादा मुसीबातों का सामना करना पड़ रहा है।

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