सूरजमुखी की उन्नत खेती करने का सही तरीका


हमारे देश में सूरजमुखी बेहद कारगर तिलहन फसल मानी जाती है। बेहतर मुनाफा देने वाली इस फसल को नकदी खेती के रूप में भी जाना जाता है। किसानों के लिए यह मौसम अनुकूल है। इसकी बुआई कर वे फसल उत्पादन के बाद बेहतर लाभ कमा सकते हैं। जानते हैं सूरजमुखी की उन्नत खेती करने का सही तरीका-

सूरजमुखी की उन्नत खेती करने का सही तरीका


हमारे देश में सूरजमुखी बेहद कारगर तिलहन फसल मानी जाती है। बेहतर मुनाफा देने वाली इस फसल को नकदी खेती के रूप में भी जाना जाता है। किसानों के लिए यह मौसम अनुकूल है। इसकी बुआई कर वे फसल उत्पादन के बाद बेहतर लाभ कमा सकते हैं। सूरजमुखी की औसत उपज 15-20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो कि बहुत कम है।
 
जानते हैं सूरजमुखी की उन्नत खेती करने का सही तरीका-
 
1. बिजाई का समय- 15 जनवरी से 15 फरवरी तक का समय अति उत्तम है। लेकिन बिजाई के समय तापमान कम न हो अन्यथा अंकुरण में समस्या होती है। 
 
2. बीज की मात्रा- उन्नत किस्मों का 4 किग्रा (ई.सी.68415 सी) और संकर किस्मों का 1.5 से 2 किग्रा बीज प्रति एकड़ पर्याप्त होता है।
 
3. बीज उपचार और बिजाई विधि- सूरजमुखी के बीज शीघ्र अंकुरण, अधिक जमाव और अधिक उत्पादन के लिए बीज को 4-6 घण्टे तक भिगोयें। बीजोपचार किसी फफूंदनाशी जैसे कैप्टान, थिराम, बैविस्टिन, काबेन्डाजिम आदि से अवश्य कर लें ताकि बीज जनित बीमारी न हो।
 
4. मिट्टी और जलवायु- पानी के अच्छे निकास वाली सभी तरह की मिट्टियों में इस की खेती की जा सकती है। लेकिन दोमट और बलुई दोमट मिट्टी जिस का पीएच मान 6.5-8.5 हो, इस के लिए बेहतर होती है। 26 से 30 डिगरी सेंटीग्रेड तापमान में सूरजमुखी की अच्छी फसल ली जा सकती है।
 
5. खेत की तैयारी- खेत की पहले हलकी फिर गहरी जुताई कर के मिट्टी को भुरभुरी और बराबर कर लेना चाहिए। आखिरी जुताई से पहले एफवाईएम की सही मात्रा डाल दें। रीज प्लाऊ की मदद से बोआई के लिए तय दूरी पर मेंड़ें बना लें।
 
6. संकर बीज 60×30 और अन्य बीज 45×30 सेंटीमीटर की दूरी पर बनी मेंड़ों पर 30 सेंटीमीटर की गहराई पर बोएं। बरसात होने या पानी भरा होने पर बोआई न करें।
 
7. छंटाई- जब पौधे लगभग 10 दिन के हो जाएं और कहीं पर एक से अधिक पौधे दिखाई पड़ें तो ओज वाले पौधे को छोड़ कर बाकी को उखाड़ दें।
 
8. सिंचाई- बोआई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें फिर 7-8 दिनों के अंतर पर करें। 
 
9. खास- परागण को बढ़ाने के लिए फूल खिलने के बाद करीब 10 से 15 दिनों तक सुबह 8 से 11 बजे के बीच मुलायम कपड़ा हाथ में लपेट कर फूलों में फेरते जाएं।
 
ध्यान रखें-
 
1. सूरजमुखी में पोषक तत्वों की अधिक आवश्यकता होती है।
 
2. बोनी के पहले 10 से 12 टन कम्पोस्ट या अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद को प्रति हेक्टयर की दर से तीन साल में एक बार डालें।
 
3. 60-80 कि.ग्रा. नत्रजन, 60 कि.ग्रा. फास्फोरस और करीब 40 कि.ग्रा. पोटॉश प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में डाले।
 
4. उर्वरकों को भूमि में बीज से 2.5 से.मी. नीचे और 5 से.मी. दूर डाले जिससे पौधा इन्हें अच्छी तरह अवशोषित कर सके।
 
5. यदि मिट्टी में गंधक,जिंक और बोरॉन की कमी हो तो मिट्टी परीक्षण के आधार पर अनुमोदित मात्रा दें।
 
6. बोआई के दिन, कलिका बनने के समय (30 से 35 दिन), फूल खिलने के समय (40 से 55 दिन) और दाना भरने के समय (65 से 70 दिन) नमी अधिक न हो। इस बात का भी पूरा ध्यान रखें।
 
 
 
 

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