जानिए सूखे और भारी बारिश के लिए आई इस अनोखी तकनीक के बारे में


देश में लम्बे समय तक बारिश न होने या अचानक बेमौसम होने वाली बारिश से फसलों की बर्बादी होती है। जिसका भुगतान किसान को करना पड़ता है। अबअहमदाबाद की एक सामाजिक संस्था ने अनोखी जल सरंक्षण प्रणाली की खोज करी है। जिसे भुंगरू के नाम से जाना जाता है। जानिए इसके अनेक गुण...

जानिए सूखे और भारी बारिश के लिए आई इस अनोखी तकनीक के बारे में


देश में लम्बे समय तक बारिश न होने या अचानक बेमौसम होने वाली बारिश से फसलों की बर्बादी होती है। जिसका भुगतान किसान को करना पड़ता है।

लेकिन अब इसका समाधान भी निकल गया है। दरअसल अहमदाबाद की एक सामाजिक संस्था ने अनोखी जल सरंक्षण प्रणाली की खोज करी है। जिसे भुंगरू के नाम से जाना जाता है।

 

बता दें इस खोज से गुजरात के सिंचित इलाकों के किसान स्ट्रॉ के ज़रिए बाढ़ के पानी को सिंचाई के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें किसान एक स्वदेशी तकनीक भुंगरू टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। सिंचाई की इस तकनीक में महिलाएं भी बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं।

भुंगरू को मिट्टी की लवणता वाले क्षेत्रों में प्रयोग किया जा रहा है। इस प्रणाली में एक पाइप को ज़मीन के अंदर, इस तरह फिट किया जाता है कि बाहरी ज़मीन का पानी इससे होता हुआ पहले फिल्टर होता है, फिर ज़मीन के भीतर बने कुएं में जमा हो जाता है। बाद में किसान उस पानी को मोटर पम्प का प्रयोग कर बाहर निकालकर सिंचाई कर सकते हैं।

इससे किसानों का दोगुना फायदा हो जाता है। साथ ही, ये तकनीकी मानसून के दौरान होने वाले पानी के नुकसान का भी बचाव करती है। गुजरात ईकोलॉजी कमीशन ने बताया, राज्य के सात ज़िलों में करीब 2.2 लाख हेक्टेयर ज़मीन की सिंचाई भुंगरू तकनीक से की गई है। 

भुंगरू को बिप्लव पॉल ने डिवेलप किया है। पॉल नैरीता सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर हैं। इस तकनीक के ज़रिए सूखे के महीनों में बाढ़ के बेकार पड़े पानी को सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक से होने वाली सिंचाई के पानी में नमक की मात्रा भी काफी कम होती है।