जानें तिल के अनेक फायदे


तिल में मोनो सैचुरेटेड फैटी एसिड होता है। ये शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करके गुड़ कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग, दिल का दौरा और अथेरोस्क्लेरोसिस की संभावना को कम करता है। आयुर्वेद में तिल मधुमेह, कफ, पित्त-कारक, निम्न-रक्तचाप में लाभ, स्तनो में दूध उत्पन्न करने वाला, गठिया, मलरोधक और वात नाशक माना जाता है।

जानें तिल के अनेक फायदे


तिल में मोनो सैचुरेटेड फैटी एसिड होता है। ये शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करके गुड़ कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग, दिल का दौरा और अथेरोस्क्लेरोसिस की संभावना को कम करता है। आयुर्वेद में तिल मधुमेह, कफ, पित्त-कारक, निम्न-रक्तचाप में लाभ, स्तनो में दूध उत्पन्न करने वाला, गठिया, मलरोधक और वात नाशक माना जाता है।

हृदय की मांसपेशियो के लिए

यह पोषक तत्वों से परिपूर्ण होता है। इसमे जरूरी मिनरल जैसे कैल्शियम, आयरन, जिंक, मैग्नीशियम और सेलीनीयम पाया जाता है जो हृदय की मांसपेशियो को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियंत्रित अंतराल में धड़कने में मदद करता है।

कमर दर्द और पीठ दर्द

कमर दर्द और पीठ दर्द दूर करने के लिए हींग और सोंठ को मिलाकर गर्म करें और इस तिल के तेल में मिलकर दर्द वाले स्थान पर लगाए बहुत जल्दी लाभ मिलेगा.

त्वचा पर लगाएं

तिल का उपयोग चेहरे और त्वचा को निखारने में किया जाता है। इसके साथ ही प्रतिदिन तिल के तेल की मालिश करने से त्वचा की खुश्की दूर हो जाएगी।

खाँसी में फायदेमंद

सफेद तिल और काली मिर्च 2 चम्मच मिलाकर, 1 ग्लास पानी में अच्छी तरह उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए तो इसे छान लें और हल्का गर्म ही पीलें। इससे खाँसी में लाभ मिलेगा।

शिशुओं के लिए

100 ग्राम तिल के अंदर 18 ग्राम प्रोटीन होता है। ये बच्चों के विकास और उनकी हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।

बच्चों में बिस्तर गीला करने की आदत होती है, इसके लिए 50 ग्राम तिल में 200 ग्राम गुड़ मिलाकर इन्हें पिसलें और प्रतिदिन सुबह-शाम 5 से 10 ग्राम की मात्रा खिलाएं।

खून की कमी

यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इसका एंटी ग्लाइसेमिक प्रभाव रक्त में ग्लूकोस के स्तर को 36 प्रतिशत तक कम करने में सहायक होता है।

खूनी बवासीर

अगर खूनी बवासीर से परेशान हैं तो 10 ग्राम काली तिल को पानी के साथ पीसकर 1 चम्मच मक्खन मिलाकर खाएं। इसमें आप मिश्री का उपयोग भी कर सकते हैं और दिन में दो बार खाएं।

सूजन या मोच

मोच में होने वाले दर्द को भगाने के लिए तिल को पीसकर पानी में मिलाएं और हल्का गर्म-गर्म मोच वाले स्थान पर लगाने से लाभ मिलेगा। इसके साथ ही तिल का तेल 50 ग्राम इसमे आधा चम्मच सेंधा नमक मिलाकर गर्म करलें। जब यह तेल हल्का गर्म हो जाए तब रात में सोने से पहले सूजन वाले स्थान पर इससे मालिश करें।

मूह के छाले से आराम

मूंह में तकलीफ दायक छाले हो जाने पर तिल के तेल में सेंधा नमक मिलकर छालो पर लगाएं।

मुहासे ठीक करें

चेहरे पर मुहासे होने पर तिल को पीसकर मक्खन के साथ मिलाकर लगाने से किल-मुहासे ठीक हो जाते हैं।

फटी एड़ीया

बता दें अगर आप फटी हुई एडियों से परेशान हैं तो अब आपको घबराने की जरूरत नही है। तिल के तेल में थोड़ा सा सेंधा नमक और मोम को मिलाकर फटी एड़ियों पर लगाने से यह जल्दी भर जाते हैं।

दांतों के लिए

पायरिया और दांतो के हिलने की समस्या होने पर फिर तिल के तेल को 10-15 मिनिट तक मूह में रखे और फिर इसी से गरारे करने चाहिए। साथ ही ऐसा करने से दांतो के दर्द में भी आराम मिलता है। वहीं गर्म तिल के तेल के साथ हींग का भी प्रयोग किया जा सकता है।

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