अयोध्या विवाद पर मध्यस्थता, कोर्ट नें मांगे मध्यस्थ के नाम


बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई करते हुए कहा, अगर संभव हो इस मसले को मध्यस्थता के जरिए ही सुलझाया जाए। कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि यह भावनाओं से जुड़ा हुआ मामला है और इस मामले में कोई भी कदम आपसी बातचीत के जरिए निकाला जाए।

अयोध्या विवाद पर मध्यस्थता, कोर्ट नें मांगे मध्यस्थ के नाम


बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई करते हुए कहा, अगर संभव हो इस मसले को मध्यस्थता के जरिए ही सुलझाया जाए। कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि यह भावनाओं से जुड़ा हुआ मामला है और इस मामले में कोई भी कदम आपसी बातचीत के जरिए निकाला जाए। इसके बाद मस्जिद पक्ष मध्यस्थता की बात को मानने के लिए तैयार है। लेकिन हिंदू महासभा ने इसका विरोध किया है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़े संदेश में मध्यस्थता की बात कहते हुए कोर्ट के मध्यस्थता वाले फैसले को सुरक्षित रखा है।

 

 

सुप्रीम कोर्ट में हिंदू महासभा के वकील ने कहा कि अयोध्या श्री राम की जन्मभूमि है। इसलिए राम जन्मभूमि को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। इस मामले पर मुस्लिम पक्ष को यह बात समझनी चाहिए की राम जन्म भूमि के पास ही राम मंदिर बनेगा और मस्जिद को कहीं और बनवाया जा सकता है।

 

तो वहीं इस पूरे मामले पर मस्जिद पक्ष के वकील ने साफ किया कि वह किसी भी तरीके के मध्यस्ता के लिए तैयार है। लेकिन कोर्ट यह तय करें कि मध्यस्था किस प्रकार की होगी और किस प्रकार का समझौता किया जाएगा। जिसके बाद हम हर तरह के समझौते के लिए तैयार है।  

 

इस मामले पर CJI रंजन गोगोई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राम मंदिर का मामला एक संवेदनशील मामला है। जिसे वह जल्द से जल्द सुलझाना चाहते हैं। जिस पर उन्होंने दोनों पक्षों से कहा है कि वह जल्द से जल्द मध्यस्थों का नाम कोर्ट को बताएं और यह कार्यक्रम आज ही होना चाहिए जिससे जल्द से जल्द इस मामले को सुलझाया जा सके।