ऐसे करें मिट्टी के बिना बागवानी


देश ने कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और स्वर्ण क्रांति के बाद वो मुकाम हासिल कर लिया हैं। बता दें खेती करने के लिए सबसे पहले जगह की जरूरत होती है उसके बाद से मिट्टी की. लेकिन अब ऐसा नहीं हैं. ऐसा मुमकिन हो सका है खेती की एक खास विधि से। साथ ही इस अनूठे तरीके को हाइड्रोपोनिक्स कहते हैं।

ऐसे करें मिट्टी के बिना बागवानी


देश ने कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और स्वर्ण क्रांति के बाद वो मुकाम हासिल कर लिया हैं। बता दें खेती करने के लिए सबसे पहले जगह की जरूरत होती है उसके बाद से मिट्टी की. लेकिन अब ऐसा नहीं हैं. ऐसा मुमकिन हो सका है खेती की एक खास विधि से। साथ ही इस अनूठे तरीके को हाइड्रोपोनिक्स कहते हैं।

वहीं खेती की यह पद्धति आने वाले समय में अब लैब से निकलकर आम लोगों के टेरेस और बालकनी तक पहुंच सकेगी. बता दे कि ‘केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान’ इसके लिए सस्ते दर पर फॉम्र्युलेशन (खेती का तरीका) लोगों तक उपलब्ध कराएगा। खबरों के मुताबिक, हाल ही में लखनऊ के गोमतीनगर के एक निवासी ने इंटरनेट से देखकर इस तकनीक का प्रोटोटाइप डिजाइन तैयार तो कर लिया, लेकिन उसके न तो पौधे बढ़े और न ही फले-फूले।

इसके साथ ही  पोषक तत्वों का फॉम्यरुलेशन मार्केट में काफी महंगा था. बाद में उसने संस्थान से सहायता के लिए अनुबंध (ठेका लेना ) का अनुरोध किया. संस्थान के निदेशक डॉ. एस.आर. सिंह केअनुसार, हाइड्रोपोनिक्स विधि को आम लोगों तक सस्ते दर पर पहुंचाया जाएगा. इसके अंदर घर में लगाने के लिए संस्थान में मॉडल बनाकर बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं हाइड्रोपोनिक्स विधि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस विधि से खेती करने के लिए मौसम और मिट्टी की गुणवत्ता का मोहताज नहीं रहना होगा।

इस विधि से खेती करने के लिए मिट्टी के जगह पर बजरी, पर्लाइट (एक तरह के पत्थर के टुकड़े) या कोकोपीट (नारियल के जूट से बना पदार्थ) का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि इन पौधों की जड़ों को पानी में पोषक तत्वों का घोल नियमित रूप से उपलब्ध कराते हैं।

किसी भी पौधे को जीवित रहने के लिए पोषक तत्व होने जरूरी होते होते हैं. ये तत्व पौधे मिट्टी से लेते हैं. अगर ये आवश्यक तत्व उन्हें पानी के साथ उपलब्ध करा दिए जाएं तो मिट्टी की कोई जरूरत ही नहीं रह जाएगी. बस इतना करना होगा कि इस पौधे उगाने के लिए वातावरण को थोड़ा नियंत्रित करना होगा.

साथ ही हाइड्रोपोनिक्स विधि से खेती करके 90 फीसद तक पानी की बचत की जा सकती है. क्योंकि, पानी रिसाइकल किया जाता है. बता दें इस विधि से मिट्टी के मुकाबले उतने ही स्थान में 2 से 8 गुना उत्पादन किया जा सकता है। पौधों में भी तेज़ी से वृद्धि होने से सीमित जगह में ही कई फसलें उगाई जा सकती हैं।