यहां की मिट्टी में हो रही है केसर की खेती


केसर की खेती के लिए कश्मीर जाने की कोई जरूरत नहीं होगी। दरअसल, अब केसर आपको आसपास के राज्यों में ही आसानी से मिल जाएगा। वहीं हर कोई इसकी खेती को देखने या करने की इच्छा रखता है. अब आपको ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि हाड़ौती-मालावा की धरती भी केसरिया फूल की खेती से लहलहा रही है।

यहां की मिट्टी में हो रही है केसर की खेती


केसर की खेती के लिए कश्मीर जाने की कोई जरूरत नहीं होगी। दरअसल, अब केसर आपको आसपास के राज्यों में ही आसानी से मिल जाएगा। वहीं हर कोई इसकी खेती को देखने या करने की इच्छा रखता है. अब आपको ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि हाड़ौती-मालावा की धरती भी केसरिया फूल की खेती से लहलहा रही है।

बता दें राजस्थान के कोटा जिले के किसानों ने मोडक और चेचक की आधुनिक तकनीक का प्रयोग करके केसर की खेती की है. साथ ही इससे किसानों को काफी अच्छी आमदनी भी प्राप्त हो रही है. फिलहाल किसान इसके फूल को तोड़ने में काफी ज्यादा व्यस्त हैं।

यहां के किसान अब केसर की खेती करने में लग गए है. दरअसल फतेहपुर निवासी किसान रंगलाल सुमन ने विषम परिस्थितियों के बाद भी केसर की खेती करके अन्य किसानों को प्रेरित किया है। हाल ही में रंगलाल के खेत में केसर के फूल काफी तेजी से उग रहे है. इन फूलों की तुड़ाई का कार्य शुरू हो गया है।



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वे बोले रास्ते में जाते वक्त उन्होंने केसर के फूलों को उगते हुए देखा था तो फिर उन्होंने यहां के किसानों से इसकी जानकारी ली थी. उन्होंने एक साथ विचार -विमर्श करके साथ में खेती के बारे में विस्तार से जानकारी को प्राप्त किया है. वहीं रंगलाल लगातार किसानों के संपर्क में रहे हैं और लागातर केसर की निराई-गुड़ाई का कार्य कर रहे है. इसके साथ ही रंगलाल आधा किलो तक फूलों की तुड़ाई कर चुके हैं जिससे काफी अच्छी खेती प्राप्त हुई है।

 

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