इस तरह मछली पालन करने पर मिलेगी 60% सब्सिडी


सरकार समय-समय पर मछली पालकों के लिए नई-नई योजनाएं बना रही है और उनपर सब्सिडी भी प्रदान कर रही है. अगर आप यह बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं तो आप रिसर्कुलर एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) तकनीक द्वारा सीमेंट से बने टैंक बनाकर मछली पालन शुरू कर सकते हैं।

इस तरह मछली पालन करने पर मिलेगी 60% सब्सिडी


सरकार समय-समय पर मछली पालकों के लिए नई-नई योजनाएं बना रही है और उनपर सब्सिडी भी प्रदान कर रही है. अगर आप यह बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं तो आप रिसर्कुलर एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) तकनीक द्वारा सीमेंट से बने टैंक बनाकर मछली पालन शुरू कर सकते हैं।

बता दें अगर आप इस तकनीक को अपनाते है तो केंद्र सरकार इसमें आपकी पूरी मदद करती है. इस आरएएस (RAS)  तकनीक की मदद से पानी का जो बहाव होता है उससे निरंतर बनाए रखने लिए पानी के आने और जाने दोनों की पूरी तरह व्यवस्था की जाती है। साथ ही इसके लिए न तो आपको ज्यादा पानी और न ही ज्यादा जगह की जरूरत पड़ती है.

वहीं एक एकड़ तालाब में करीब  25 हजार मछली डाली जाती हैं. जबकि इस तकनीक द्वारा एक हजार लीटर पानी में कुल 110-120 मछली डाली जाती है. जिससे एक मछली को केवल नौ लीटर पानी मिलता है. बता दें आज के समय में मछली खाने वालों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2030 में भारत में मछली की खपत चार गुना बढ़ जाएगी।

अगर आप इस तकनीक से मछली पालन करना चाहते है. उसके लिए सबसे पहले आपको 625 वर्ग फीट बड़ा और 5 फीट गहरा सीमेंट का टैंक बनवाना होगा. इस टैंक को बनवाने के बाद आप  इसमें कुल 4 हजार मछली पाल सकते है। वहीं उत्तरप्रदेश में अभी तक हज़ारों मछली पालकों ने इस तकनीक को अपनाकर अच्छा मुनाफा कमाया है।

बता दें इस आरएएस तकनीक को सरकार ने नीली क्रांति के अंर्तगत रखा है और इस परियोजना को पुरे देश में  लागू करने की योजना बनाई है. भारत सरकार नेनीली क्रांति के अंतर्गत 'रिसरकुलर एक्वाकल्चर सिस्टम' के नाम से यह योजना शुरू की गई है। वहीं इस योजना द्वारा मछली पालक को 50 लाख की यूनिट कॅास्ट की दर से एक लघु इकाई का प्रोजेक्ट लगाने का प्रावधान दिया गया है. अब केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस परियोजना के अंर्तगत सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा और कमजोर वर्ग जैसे महिला, एससी, एसटी आदि को 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।

 

 

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