इस हल्दी को मिली है जीआई पहचान


ओडिशा के कंधमाल में आदिवासियों से उगाई जाने वाली हल्दी को भौगौलिक पहचान (जीआई प्रमाणन) मिल गया है। बता दें यहां पर सेंट्रल टूल रूम ऐंड ट्रेनिंग सेंटर में स्थापित इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी आफ फैसिलिटेशन सेंटर के प्रमुख ने बताया है कि कंधमाल की हल्दी को भौगौलिक संकेतिक पंजीयक से जीआई पहचान मिल गई है।

इस हल्दी को मिली है जीआई पहचान


ओडिशा के कंधमाल में आदिवासियों से उगाई जाने वाली हल्दी को भौगौलिक पहचान (जीआई प्रमाणन) मिल गया है। बता दें यहां पर सेंट्रल टूल रूम ऐंड ट्रेनिंग सेंटर में स्थापित इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी आफ फैसिलिटेशन सेंटर के प्रमुख ने बताया है कि कंधमाल की हल्दी को भौगौलिक संकेतिक पंजीयक से जीआई पहचान मिल गई है।

वहीं यहां की हल्दी चिकित्सीय गुणों के कारण भी इसका दावा हुआ था। इस हल्दी की फसल को नकदी क्षेत्र की फसल भी कहा जाता है। अब यहां कंधमाल की हल्दी को विधिक संरक्षण प्राप्त हो गया है। इससे इसकी आने वाले समय में वैश्विक पहचान भी बढ़ जाएगी। सबसे ज्यादा यह हल्दी अपनी औषधियां विशेषताओं को लेकर प्रसिद्ध है।

दरअसल हल्दी के जीआई टैग के लिए ओडिशा सरकार ने हल्दी को भौगोलिक मान्यता देने हेतु आवेदन को प्रस्तुत किया था। हल्दी को भौगोलिक मान्यता देने हेतु आवेदन को प्रस्तुत किया था। बता दें इससे पहले ओडिशा में पश्चिम बंगाल के साथ रसगुल्ले को लेकर भी विवाद चल रहा है जो कि ओडिशा के हाथ से निकल चुका है। साथ ही ओडिशा सरकार इस बात के बाद काफी सावधान है। सरकार की ओर से सेंट्रल रूम औरट्रेनिंग सेंटर के दावार जारी की अर्जी के संबंध में बताया गया है कि कंधमाल हल्दी की गुणवत्ता और इसकी पूर्ण स्वतंत्रता पर पिछले दो साल से अनुंसधान जारी हुआ है। अब सारे जांच तथ्यों को परखने के बाद इस तरह का प्रमाण जारी किया गया है।

वहीं देश के अन्य स्थान पर उत्पादित हल्दी के मुकाबले कंधमाल की हल्दी का रंग सोने की तरह सुर्ख होता है और इसमें कई तरह के उत्तम गुण पाए जाते है। यहां की 15 प्रतिशत से ज्यादा आबादी खेती से जुड़ी हुई होती है।

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