टाइम पत्रिका के कवर स्टोरी का भारत- पाक कनेक्शन


ये मामला गंभीर है क्योंकि यहाँ बात भारत के प्रधानमंत्री की हो रही है, या यूँ कहें कि एक ऐसे देश के शीर्ष-नेतृत्व की हो रही है जो वैश्विक पटल पर एक महाशक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है। इस मामले पर जब पंचायती टाइम्स की रिसर्च टीम ने पड़ताल की तो मामले के तार भारत और पाकिस्तान से जुड़ते नजर आये।

टाइम पत्रिका के कवर स्टोरी  का भारत- पाक कनेक्शन


अमेरिका की मशहूर पत्रिका टाइम ने अपने ताजा अंक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कवर स्टोरी की है। इस स्टोरी में विवादास्पद सवाल के साथ। पत्रिका ने पूछा है - "क्या दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र मोदी सरकार को आने वाले और पांच साल सहन कर सकता है?"  पीएम मोदी के चेहरे के साथ इस पत्रिका का मुखपृष्ठ शीर्षक है - ''इंडियाज डिवाइडर इन चीफ'' ('India's Divider In Chief') जिसका अर्थ है - 'भारत को प्रमुख रूप से बांटने वाला।'

अव यहां सोचनें योग्य बात ये है कि, इस पत्रिका नें 2014 से 2017 तक तीन बार 2014, 2015 और 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  को अपनी कवर स्टोरी  में जगह दी है जिसमें एक बार मोदी को दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूचि में शामिल किया था। वहीं एकबार 'व्हाय मोदी मैटर्स' ('Why Modi Matters') नाम से कवर स्टोरी की थी, पर 2019 आते-आते ये पत्रिका  मोदी को ''इंडियाज़ डिवाइडर इन चीफ'' ('India's Divider In Chief') कहने लगता है। 

ये मामला गंभीर है क्योंकि यहाँ बात भारत के प्रधानमंत्री की हो रही है, या यूँ कहें कि एक ऐसे देश के शीर्ष-नेतृत्व की हो रही है जो वैश्विक पटल पर एक महाशक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है। इस मामले पर जब पंचायती टाइम्स की रिसर्च टीम ने पड़ताल की तो मामले के तार भारत और पाकिस्तान से जुड़ते नजर आये।

कैसे है ये भारत- पाक कनेक्शन

इस पत्रिका ने नेहरू के समाजवाद और भारत की मौजूदा सामाजिक परिस्थिति की तुलना की है। इस  स्टोरी को आतिश तासीर नाम के एक पत्रकार ने लिखा है। अब यहां सवाल खड़ा होता है कि आखिर ये आतिश तासीर  कौन है?
आतिश तासीर एक ब्रिटिश मूल के लेखक और पत्रकार हैं। इनके पिता पाकिस्तानी राजनेता और व्यवसायी थे और मां एक भारतीय पत्रकार जिनका नाम तवलीन सिंह है। ये वही तवलीन सिंह हैं, जिनके आर्टिकल इंडिया टुडे और द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित होते हैं।

गौर करने योग्य बातें

भारत में लोकसभा चुनाव का दौर चल रहा है, आख़िरी चरण का मतदान 19 मई को होना है। इससे पहले टाइम ने अपनी वेबसाइट पर इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है। टाइम के इस लेख में 1984 के सिख दंगों और 2002 के गुजरात दंगों का भी ज़िक्र है। लेख में कहा गया है कि हालांकि कांग्रेस नेतृत्व भी 1984 के दंगों को लेकर आरोप मुक्त नहीं है, लेकिन फिर भी इस पार्टी के द्वारा दंगों के दौरान उन्मादी भीड़ से खुद से अलग रखा गया, लेकिन नरेंद्र मोदी 2002 के दंगों के दौरान अपनी चुप्पी से 'उन्मादी भीड़ के दोस्त' साबित हुए। 18 साल बाद चुनाव के दौरान गुजरात दंगों पर लेख लिखना और आतिश तासीर  का भारत- पाक कनेक्शन इस बात की तरफ इशारा करता है कि कहीं ये आर्टिकल  'विशेष' प्रयोजन से तो नहीं लिखा गया है?