बंगाल में मनमानी को देखनें के बाद भी चुनाव आयोग मौन क्यों?


अब यहां सवाल ये खड़ा होता है की पश्चिम बंगाल में हो रहे मनमानी के देखनें के बाद भी चुनाव आयोग क्यों मौन है? क्या भारतीय लोकतंत्र की दुहाई देने वाले लोगों को आज लोकतंत्र पर कोई खतरा नहीं दिख रहा है?

बंगाल में मनमानी को देखनें के बाद भी चुनाव आयोग मौन क्यों?


तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में जुबानी जंग के बीच तो आम है। पर अब एक बार फिर यहां पश्चिम बंगाल में हेलिकॉप्टर लैंडिंग और रैली को इजाजत न मिलने का मुद्दा गरमा गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को पश्चिम बंगाल के जाधवपुर में रैली करने की इजाजत नहीं दी गई है। बताया जा रहा है कि उनके हेलिकॉप्टर को भी लैंडिंग की परमिशन नहीं मिली है।

आपको बता दें की बंगाल के 9 सीटों पर चुनाव के आखिरी चरण में होना है। 19 मई को होनें वाले इस मतदान के लिए सोमवार को अमित शाह की तीन रैलियों का कार्यक्रम है। जिसमें से एक रैली दक्षिण 24 परगना जिले के जाधवपुर में दोपहर 12.30 बजे होनी थी। लेकिन रैली से कुछ वक्त पहले ही परमिशन रद्द होने की खबर आई है। साथ ही अमित शाह के हेलिकॉप्टर को भी लैंडिंग की इजाजत नहीं दी गई है।

बंगाल के हर चुनाव में तृणमूल कांग्रेस पर गुंडागर्दी करने का आरोप लगता रहा है। चाहे वो पंतायत चुनाव हो या फिर लोकसभा, आरोक के साथ-साथ गुंडागर्दी साफ देखनें को भी मिलती है, और चुनाव आयोग कुछ नहीं कर पाता है। हालांकि, BJP और TMC के नेताओं की जुबानी जंग तो काफी पुरानी है। हेलिकॉप्टर को लैंडिंग की परमिशन नहीं देना ये भी नया नहीं है। पहले भी अमित शाह के अलावा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हेलिकॉप्टर को लैंडिंग की परमिशन नहीं दी गई थी। साथ ही हर चरण के मतदान में हिंसक घटनाओं को लेकर भी बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर उंगली उठाई है।

अब यहां सवाल ये खड़ा होता है की पश्चिम बंगाल में हो रहे मनमानी के देखनें के बाद भी चुनाव आयोग क्यों मौन है? क्या भारतीय लोकतंत्र की दुहाई देने वाले लोगों को आज लोकतंत्र पर कोई खतरा नहीं दिख रहा है? यहां हर बात पर फैसला देने वाला सुप्रीम कोर्ट भी कुछ नहीं बोल रहा है, और नही बात बात पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले भी कुछ नही कह रहे है।