अचानक पड़े छापे से रिस्पॉन्सिव इंडस्ट्रीज को लगा भारी झटका


मुंबई. पावर कॉरिडोर ब्यूरो. DRI नोएडा के अधिकारियों ने आज बड़े पैमाने पर SAFTA के उल्लंघन का खुलासा किया. भारत की एक अग्रणी रेज़ीलिएंट फ्लोरिंग और सिंथेटिक लेदर निर्माण की कंपनी पर मारे गए छापे के माध्यम से यह मामला प्रकाश में आया.

अचानक पड़े छापे से रिस्पॉन्सिव इंडस्ट्रीज को लगा भारी झटका


मुंबई. पावर कॉरिडोर ब्यूरो. DRI नोएडा के अधिकारियों ने आज बड़े पैमाने पर SAFTA के उल्लंघन का खुलासा किया. भारत की एक अग्रणी रेज़ीलिएंट फ्लोरिंग और सिंथेटिक लेदर निर्माण की कंपनी पर मारे गए छापे के माध्यम से यह मामला प्रकाश में आया. यह कम्पनी कोई और नहीं बल्कि तीस वर्षों से भारत में चल रही रेस्पॉन्सिव इंडस्ट्रीज लिमिटेड है, जो राजस्व खुफिया निदेशालय के अधिकारियों के अनुसार, SAFTA के नियमों का उल्लंघन के मामले में पकड़ में आई है.

वर्ष 2006 में भारत ने अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका सहित आठ देशों के साथ दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र समझौते पर हस्ताक्षर करके उसे देश में लागू किया है. और यह संभवत: पहला ऐसा उदाहरण था जहां किसी कंपनी को भारत में SAFTAकी मूल आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए पाया गया.

गुरुवार तड़के मुंबई तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में स्थित इस कंपनी के रिहाइशी, कारपोरेट और मैन्यूफैक्चरिंग यूनिटों पर छापा मारने के बाद, डीआरआई के अधिकारियों ने कंपनियों के विनिर्माण व्यवसाय के भीतरी गलियारों में SAFTA का भारी उल्लंघन पाया.

मुंबई स्थित कंपनी के निदेशक श्री ओमप्रकाश अग्रवाल और कंपनी के निदेशक श्री ऋषभ अग्रवाल पर साफ्टा (SAFTA) के नियमों का अनुचित लाभ लेने का आरोप लगाया गया है. बताया जाता है कि यह कंपनी विनाइल फ़्लोरिंग और सिंथेटिक लेदर स्पेस में नए उत्पादों का विकास करते हुए एक बड़ी ब्रांड बिल्डिंग एक्सरसाइज की दिशा में प्रयासरत है.

वैश्विक रूप से शीर्ष तीन में से एक बनने की महत्वाकांक्षा के साथ भारत में नंबर एक विनाइल फ्लोरिंग के निर्माण का दावा करने वाली कंपनी रेस्पान्सिव इन्डस्ट्रीज़ का $ 15 बिलियन का वैश्विक व्यापार है और सालाना 5-7% की सीएजीआर से इसकी बढ़त हो रही है. दुनिया भर के 65देशों काम कर रही यह वैश्विक कंपनी अगले 4 वर्षों में एक $ 1 बिलियन अमरीकी डालर वाली कंपनी बनने का लक्ष्य लेकर चल रही है लेकिन इस छापे के बाद इस वैश्विक बाज़ार यात्रा पर विराम लग सकता है.

कंपनी की कार्य प्रणाली में एक छोटे घोटाले के कारण साफ्टा के नियमों के घालमेल का यह पूरा मामला पकड़ में आ गया. और इसके कारण यह कंपनी इस बड़ी अप्रत्याशित कार्रवाई के राडार पर आ गई. दरअसल कंपनी डबल इनवॉइस भी बनाती थी और इस तरह के आर्थिक अपराध का बाज़ारी व्यवहार पहले ही छुपे तौर पर चलन में है. लेकिन यह अपराध एक पूरे बड़े आर्थिक अपराध के साम्राज्य को बेनकाब कर देगा, यह किसी ने नहीं सोचा था. डबल इनवाइस की गड़बड़ी क्या पकड़ में आई, डीआरआई के चुस्त और अनुभवी अधिकारियों को बड़ी गड़बड़ी की दुर्गन्ध आ गई. गुप्त रूप से चली एक नियोजित जांच के साथ डीआरआई पूरे काले कारोबार के ग्राउंड जीरो तक पहुंच गया. और इस तरह आया आज का दिन जब निदेशालय ने इसकी सीधी धरपकड़ करके इसे अपने अन्जाम तक पहुंचाने की सख्त शुरुआत कर दी.

तस्करी और काले धन पर नज़र रखने की प्रमुख एजेंसी के रूप में, राजस्व खुफिया महानिदेशालय (DRI) अपने सकारात्मक-सक्रिय अस्तित्व के लिए सुप्रसिद्ध है और यही कारण है कि DRI कभी भी विवादों के दायरे में नहीं आई है. निस्संदेह, निदेशालय की सफल छवि का श्रेय श्री देबी प्रसाद दास को जाता है, जो 1985 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं और डीआरआई में महानिदेश के तौर पर पदस्थ हैं. श्री दास के उत्कृष्ट देखरेख में विभाग की सफलता की कहानियां अन्य सरकारी एजेंसियों के लिये प्रेरणादायी हैं. श्री दास को डिप्टी सेक्रेटरी जनरल, विश्व सीमा शुल्क संगठन (WCO) के पद के लिए देश के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में भी नामित किया गया है. DRI की उत्कृष्टता के प्रतीक एक और नाम को कम अहम नहीं आँका जा सकता है. श्री अजय भूषण पांडे, राजस्व सचिव जो कि 1984के महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी के तौर पर अपने उत्तरदायित्व के प्रति पूर्ण समर्पित भाव से अपनी सेवायें दे रहे हैं, वह अपनी सक्रियता के कारण अवैध आर्थिक गतिविधियों व्यापक स्तर पर दुर्बल के अभियान में जुटे हुए हैं.

राजस्व खुफिया निदेशालय कार्रवाई के अगले चरण के लिये मामले को प्रवर्तन निदेशालय को सौंपने जा रहा है जो इस दिशा में आगे की जांच को अन्जाम देगा. अभी तक डीआरआई द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम सामने नहीं आए हैं. हालांकि नाम छिपाने की शर्त पर, एकअधिकारी के माध्यम से यह खुलासा सामने आया है कि भारत सरकार को इस छापे के माध्यम से पैसे का एक बड़ा हिस्सा मिलने वाला है. लेकिन उससे भी बड़ी चौंकाने वाली खबर यह है कि इस मामले में एक बड़े राजनीतिक परिवार की संलिप्तता देखी है, जो वर्तमान में चल रहे लोकसभा चुनावों के कारण प्रकाश में नहीं लायी जा सकती है. पावर कॉरिडोर ब्यूरो.

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