पानी के बिना जीवन की कल्पना है अधूरी


कुदरत का इंसानों को मूल्यवान तोहफा है पानी। हम कभी भी जल के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते..

पानी के बिना जीवन की कल्पना है अधूरी


 

कुदरत का इंसानों को मूल्यवान तोहफा है पानी। हम कभी भी जल के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। आज जिस तरह से हम पानी की बर्बादी कर रहें हैं इस तरह से तो वो दिन दूर नहीं जब हम पानी की बूंद-बूंद को तरस जाएंगे। कई राज्यों में लोग पीने के पानी की बढ़ती किल्लत से परेशान है बावजूद इसके लोग घंटों नहाने के लिए, गाड़ी को धोने व घरों की साफ-सफाई में काफि मात्रा में पानी बर्बाद करतें हैं। आने वाले समय में पानी की कमी पर दुनिया भर में कई शोध और रिसर्च हो रही है। एक अध्ययन के मुताबिक 2040 तक पूरी दुनिया को पीने के पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।  भारत, अमेरिका, चीन और फ्रांस के एक शोध के मुताबिक बिजली के उत्पादन के लिए भी पानी का इस्तेमाल किया जाता है।

 

भारत में हर साल बिजली की खपत बढ़ती जा रही है, बिजली की खपत को पूरा करने के लिए ज़्यादा पावर प्लांट्स की आवश्यकता हैं ऐसे में जिस तरह से पावर प्लांट्स की संख्या बढ़ेगी, उसके पानी की जरुरत भी ज़्यादा बढ़ेगी। जिससे भविष्य में पीने के पानी की भारी किल्लत हो जाएगी। पृथ्वी पर सिर्फ 3 प्रतिशत पानी ही ऐसा है जो मनुष्य के पीने लायक है। ये पीने का पानी हमें बर्फ और ग्लेशियर्स से मिलता। ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर लगातार पिघल रहे है। लगातार ग्लेशियर्स का पिघलना सकेंत है प्रकृति आपदाओं की ओर। ग्लोबल वार्मिंग से प्रकृति आपदाएं बढ़ेंगी। जिस तरह से हम पानी की बर्बादी कर रहे है जाहिर है हम अपने ही विनाश की ओर आगे बढ़ रहे हैं। आज जरूरत है स्वयं में बदलाव कि क्योकि हमारा एक छोटा सा बदलाव, समाज में क्रांति ला सकता है। आज हम सब मिलकर प्रण लें बचाएगें जल क्योंकि जल है तो जीवन है।