श्रावण मास में विशेष फलदायी होता है महामृत्युंजय महामंत्र का जाप


श्रावण मास भगवान शिव को बेहद प्रिय है इस समय की गई भोले नाथ की पूजा विशेष फलदायी होती है। महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव के मृत्युंजय रूप को समर्पित है..

श्रावण मास में विशेष फलदायी होता है महामृत्युंजय महामंत्र का जाप


श्रावण मास भगवान शिव को बेहद प्रिय है इस समय की गई भोले नाथ की पूजा विशेष फलदायी होती है। महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव के मृत्युंजय रूप को समर्पित है। इस मंत्र के हर एक बीज अक्षर में विशेष शक्ति मौजूद है। ऋग्वेद का ह्दय कहे जाने वाले इस मंत्र का श्रावण मास में जप का अलग महत्व है इस समय महामृत्युंजय महामंत्र का जप से साधक के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।  अगर साधक पूरी एकाग्रता के साथ श्रावण मास में इस महामंत्र  का जप शुरू करता है तो वह समस्त भय और संकटों से मुक्त हो जाता है।

 

1 महामृत्युंजय मंत्र की श्रद्धापूर्वक सवा लाख का जप साधना करने से व्यक्ति को जीवन में अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता साथ ही दुर्घटना से भी व्यक्ति का बचाव होता है।

2 महामृत्युंजय मंत्र के 36000 जप से भयंकर रोगी को भी स्वस्थ होने का वरदान प्राप्त होता है।

3 यदि किसी व्यक्ति पर किसी बुरी सकती का प्रभाव है तो मंत्र का 36000 बार का जप करना चाहिए।

4 वहीं अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष है तो उसके लिए महामृत्युंजय मंत्र का 11000 बार जप करना चाहिए।

5 करोबार में रुकावट, परिवारिक कलह व मकान आदि के लिए भी महामृत्युंजय मंत्र का जप विशेष फलदायी होता है।  

 

महामृत्युंजय मंत्र

 

ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बंधनानमृत्योर्मुक्षीय मामृतात।

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