बिहार की सियासत में उस समय हलचल तेज हो गई जब पटना हाई कोर्ट ने पक्ष और विपक्ष के कुल 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इन जनप्रतिनिधियों पर चुनाव के दौरान वोटिंग में अनियमितता और चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर गलत जानकारी देने के आरोप लगाए गए हैं।
अदालत के इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है और सभी की निगाहें अब अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
हारने वाले उम्मीदवारों की याचिका पर हुई सुनवाई
मामला उन विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ा है जहां चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों ने विजयी विधायकों के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को इन याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित विधायकों को नोटिस जारी कर निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई में प्रस्तुत जवाब और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
इन प्रमुख नेताओं को मिला नोटिस
नोटिस पाने वाले विधायकों में कई बड़े नाम शामिल हैं:
- बिजेंद्र यादव (जेडीयू)
- जिवेश मिश्रा (बीजेपी विधायक)
- चेतन आनंद (जेडीयू विधायक)
- अमेंद्र प्रसाद (आरजेडी विधायक, गोह)
इनके अलावा अन्य कई सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के विधायक भी नोटिस के दायरे में आए हैं।
2025 के चुनाव परिणाम के बाद बढ़ा विवाद
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे 14 नवंबर 2025 को घोषित हुए थे। चुनाव में एनडीए को बड़ी सफलता मिली थी।
- बीजेपी – 89 सीट
- जेडीयू – 85 सीट
- आरजेडी – 25 सीट
- कांग्रेस – 6 सीट
इसके अलावा, चिराग पासवान की पार्टी ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की। जीतनराम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा को 5 सीटें मिलीं, जबकि उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा 4 सीटें जीतने में सफल रही।
चुनाव परिणाम के बाद कई हारने वाले उम्मीदवारों ने मतगणना और हलफनामे में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए अदालत में याचिका दायर की थी।
अगली सुनवाई में कोर्ट संबंधित विधायकों के जवाब और सबूतों की समीक्षा करेगा। यदि आरोपों में प्रथम दृष्टया सच्चाई पाई जाती है तो मामला विस्तृत सुनवाई की ओर बढ़ सकता है।
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फिलहाल यह मामला बिहार की राजनीति में नया मोड़ लेकर आया है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि आरोपों का कितना आधार है और इसका राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा।









