दिल्ली में इन दिनों सरकारी अस्पताल में दवाओं की समस्या लोगों को खूब परेशान कर रही है। हर रोज अस्पताल की फॉर्मेसी के बाहर सैकड़ों लोग जमा होते हैं , सभी को उम्मीद रहती है कि उन्हें उसी अस्पताल के डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाई उसी फार्मेसी से मिल जाएगी। लेकिन ज़्यादातर लोगों के हाथ निराशा ही लगती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मरीजों का दवाइयां बाहर से लेनी पड़ रही है। बाहर का मतलब है ‘मेडिकल स्टोर से खुद पैसे देकर दवाइयां खरीदना’। जबकि बता दे कि दिल्ली में सरकारी अस्पतालों और मोहल्ला क्लिनिकों में मरीजों के लिए दवाएं फ्री में उपलब्ध हैं।
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मयूर विहार के पास गडोली गांव के निवासी 40 वर्षीय जयचंद कहते हैं, “उनके पास सिर्फ़ एसिडिटी की दवा है।
अब मुझे बाकी दवाई बाहर से लानी पड़ेगी।” वहीं, एक मरीज ने बताया कि, सरकारी अस्पतालों में पिछले एक साल से ये दिक्कत हो रही है, जहां कि उल्टी और मतली जैसी बीमारियों की दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
वहीं, कल्पना (26) अपनी एक साल आठ महीने की बेटी सृष्टि को बुखार, खांसी, जुकाम और अपच के लक्षण दिखने के बाद अस्पताल लेकर आई हैं। कल्पना ने बताया कि उसे फार्मेसी से सभी दवाइयां नहीं मिल पाई हैं। डॉक्टर ने जो चार दवाइयां लिखी थीं, उनमें से नेजल ड्रॉप और मल्टी-विटामिन सप्लीमेंट सिरप खत्म हो गए हैं।
लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में नियमित रूप से आने वाली कल्पना के अनुसार, पिछले साल से ही दवाओं की कमी है। खोड़ा कॉलोनी निवासी ने कहा, “मुझे केवल एलर्जी और बुखार के लिए सिरप मिल पाए।”
अब सबसे बड़ा सवाल ये कि, दिल्ली में दवाओं की किल्लत क्यों हो रही है? स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में देरी होना दवाओं की कमी का कारण है।
टेंडर व्यवस्था मेडिसीन बनाने वाली कंपनियों के लिए जारी किए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि टेंडर्स की जांच पड़ताल में थोड़ी देरी हो गई थी। जो टेंडर जारी किए गए उनमें से कई ब्लैक लिस्टेड कंपनियां थी। अब मामला कानूनी पेंच में फंस गया है जिसका समाधान किया जा रहा है। इसी वजह से प्रोसेस में टाइम लग रहा है।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह कहा कि, अभी की स्थिति एक महीने पहले की स्थिति से बेहतर है। साथ ही ये भी आश्वासन दिया है कि दवाओं की किल्लत जल्द ही दूर होगी और जरूरी दवाओं की सप्लाई शुरू कर दी है।