केंद्र सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की 28 भौगोलिक जगहों और संरचनाओं को मानक नामों के साथ आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया है। गृह मंत्रालय ने 2 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी। यह प्रक्रिया लद्दाख प्रशासन के साथ विचार-विमर्श के बाद पूरी की गई है।
सरकार के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य इन स्थानों की सही और स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करना तथा उनके नाम और भौगोलिक महत्व के बारे में आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। सूची में पर्वत चोटियों, दर्रों, हिमनदों, घाटियों, नदियों, झीलों, जल क्षेत्रों और विभिन्न भू-भागों को शामिल किया गया है।
लद्दाख की 28 जगहों को आधिकारिक नक्शे में किया गया शामिल
आधिकारिक नक्शे में दर्ज की गई 28 भौगोलिक संरचनाओं में अतीशा गिरि, कनिष्क चोटी, मार्तंड गिरि और जोरावर चोटी जैसी पर्वत चोटियां शामिल हैं। इसके अलावा करुण पीर, द्रक कार्पो और जोलमोरी को पर्वत के रूप में दर्ज किया गया है।
इसी तरह चपचिंगल दर्रा और शाचमिर्क दर्रा को दर्रे की श्रेणी में रखा गया है। पारपिक और स्कामरी हिमनद को हिमनद के रूप में तथा शकोर्गा घाटी को घाटी के रूप में दर्ज किया गया है।
लद्दाख की 28 भौगोलिक संरचनाओं की पूरी सूची
सरकारी जानकारी के अनुसार, इन 28 स्थानों को उनकी भौगोलिक प्रकृति के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज किया गया है।
पर्वत चोटियां
- अतीशा गिरि
- कनिष्क चोटी
- मार्तंड गिरि
- जोरावर चोटी
- रिनचेन जांगपो
- शाक्यश्री गिरि
- मारपा लोत्सावा री
- मिलारेपा कांगरी
- शिवा री
- महेश्वर री
पर्वत
- करुण पीर
- द्रक कार्पो
- जोलमोरी
भू-भाग
- ब्रांगसा
- कुकसेल
- देहरा कम्पास
- गोगरा
- कुमारायण प्वाइंट
- पांगलुंग
- शमाल लुंगपा
दर्रे
- चपचिंगल दर्रा
- शाचमिर्क दर्रा
हिमनद
- पारपिक हिमनद
- स्कामरी हिमनद
घाटी
- शकोर्गा घाटी
झील
- गुरु रिनपोछे
नदी
- यांगपा नदी
जल क्षेत्र
- गर्म जल क्षेत्र
आधिकारिक नक्शे पर नाम दर्ज करने का क्या है महत्व?
सरकार के अनुसार, किसी भौगोलिक स्थान को मानक नाम के साथ आधिकारिक नक्शे में शामिल करने से उसकी पहचान और नामकरण में एकरूपता आती है। इससे सरकारी अभिलेखों, नक्शों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में इन स्थानों के नामों का एक समान उपयोग किया जा सकेगा।
लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले और सीमावर्ती क्षेत्र में भौगोलिक स्थानों की स्पष्ट पहचान प्रशासन, सर्वेक्षण और सरकारी अभिलेखों के लिए महत्वपूर्ण होती है।
चीन के साथ सीमा विवाद के बीच क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
लद्दाख का पूर्वी और उत्तरी हिस्सा भारत-चीन सीमा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में वहां मौजूद भौगोलिक स्थानों की आधिकारिक पहचान और उनका सरकारी नक्शों में दर्ज होना प्रशासनिक तथा रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि, गृह मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी में यह नहीं कहा गया है कि इन 28 स्थानों को मानक नाम देने का उद्देश्य चीन के साथ सीमा विवाद में भारत के दावे को मजबूत करना है। सरकार ने इस पहल के पीछे भौगोलिक स्थानों की सही पहचान और उनके बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने को मुख्य उद्देश्य बताया है।
अरुणाचल प्रदेश में भी हुई थी ऐसी पहल
लद्दाख से पहले केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश की कई भौगोलिक जगहों को भी आधिकारिक नक्शे में मानक नामों के साथ दर्ज किया था। इस तरह की प्रक्रिया के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद भौगोलिक स्थानों की पहचान को सरकारी नक्शों और अभिलेखों में एकरूप बनाने का प्रयास किया जाता है।
यह भी पढ़ें: Drishyam 3 Worldwide Collection: अजय देवगन की फिल्म ने पहले दिन दुनियाभर में मचाया धमाल
31 अक्टूबर 2019 को केंद्र शासित प्रदेश बना था लद्दाख
लद्दाख को 31 अक्टूबर 2019 को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था। वर्तमान में लद्दाख में लेह और कारगिल दो जिले हैं।
आधिकारिक नक्शे में 28 नए भौगोलिक स्थानों को मानक नामों के साथ दर्ज किए जाने से इनकी पहचान सरकारी मानचित्र और अभिलेख व्यवस्था का हिस्सा बन गई है। इससे भविष्य में प्रशासनिक, सर्वेक्षण और भौगोलिक संदर्भों में इन स्थानों के नामों के एक समान इस्तेमाल में मदद मिल सकती है।









