प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने झारखंड के झरिया कोयला क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही आग और भू-धंसाव की समस्या से निपटने के लिए संशोधित झरिया मास्टर प्लान (Jharia Master Plan – JMP) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के कार्यान्वयन पर कुल 5,940.47 करोड़ रुपये का व्यय प्रस्तावित है।
प्राथमिकता पर होगा विस्थापितों का पुनर्वास
झरिया क्षेत्र में कोयला खदानों में लगी आग और जमीन धंसने की घटनाएं पिछले कई दशकों से आम लोगों के जीवन और सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई हैं। संशोधित मास्टर प्लान के तहत अब इन खतरनाक इलाकों से प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास कराया जाएगा। यह प्रक्रिया चरणबद्ध ढंग से पूरी की जाएगी।
आजीविका और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा
योजना में केवल पुनर्वास ही नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका के साधनों पर भी विशेष बल दिया गया है। सरकार द्वारा पुनर्वासित परिवारों के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण, रोजगारपरक योजनाएं और आत्मनिर्भरता के लिए आर्थिक सहायता के उपाय भी सुनिश्चित किए जाएंगे।
- हर पात्र परिवार को 1 लाख रुपये का आजीविका अनुदान
- 3 लाख रुपये तक का संस्थागत ऋण – वैध भू-स्वामी (LTH) और अपंजीकृत भू-धारकों (Non-LTH) दोनों के लिए
पुनर्वास स्थलों पर विकसित होंगी बुनियादी सुविधाएं
संशोधित जेएमपी के अंतर्गत जिन क्षेत्रों में लोगों को बसाया जाएगा, वहां सड़क, बिजली, जलापूर्ति, सीवरेज, साथ ही स्कूल, अस्पताल, सामुदायिक भवन और कौशल विकास केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस योजना को झरिया मास्टर प्लान कार्यान्वयन समिति की सिफारिशों के अनुसार लागू किया जाएगा, जिससे मानवीय और समग्र पुनर्वास की दिशा में सार्थक प्रगति हो सके।

वैकल्पिक आजीविका के लिए विशेष कोष की स्थापना
पुनर्वासित परिवारों को दीर्घकालिक आजीविका के अवसर प्रदान करने के लिए सरकार ‘झरिया वैकल्पिक आजीविका पुनर्वास कोष’ (Jharia Alternative Livelihood Rehabilitation Fund) की स्थापना भी करेगी। इस कोष के माध्यम से बहु-कौशल विकास संस्थानों की भागीदारी के साथ विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
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झरिया कोयला क्षेत्र में चल रही वर्षों पुरानी त्रासदी को खत्म करने की दिशा में यह निर्णय एक ऐतिहासिक और मानवकेंद्रित पहल है। इससे न केवल हजारों लोगों को सुरक्षित जीवन मिलेगा, बल्कि उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार की यह योजना झरिया जैसे संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है।









