Jharkhand Student Protest: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन शुक्रवार को 14वें दिन भी जारी रहा। सरकार से बातचीत की कोशिशों के बीच प्रदर्शनकारी छात्रों ने अब 10 सदस्यों वाली नई डेलीगेशन लिस्ट सौंपी है। खास बात यह है कि इस बार प्रतिनिधिमंडल में केवल छात्र शामिल हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से केवल छात्रों से बातचीत करने का संदेश मिलने के बाद यह सूची भेजी गई है।
सरकार से बातचीत के लिए 10 छात्रों की नई सूची
छात्र नेता रवीन्द्र पासवान ने बताया कि सरकार की ओर से संदेश दिया गया था कि बातचीत केवल छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ की जाएगी। इसके बाद आंदोलनकारी छात्रों ने 10 सदस्यों की नई सूची प्रशासन को सौंप दी है।
रवीन्द्र पासवान के मुताबिक, सरकार बातचीत के लिए जिस स्थान और जिस प्रक्रिया को तय करेगी, छात्र उसके लिए तैयार हैं। अब आंदोलनकारियों को सरकार की ओर से वार्ता की अगली प्रक्रिया और समय का इंतजार है।
कौन-कौन हैं छात्रों के प्रतिनिधिमंडल में?
नई डेलीगेशन में शामिल छात्रों के नाम हैं:
- रवीन्द्र पासवान
- पीयूष कुमार
- राजेश प्रसाद
- नीतू कुजूर
- अंकित राज
- कार्तिक सोरेन
- शालू कुमारी
- रवींद्र कुमार रवि
- आनंद कुमार
- अंकित कुमार
14वें दिन भी जारी है छात्र आंदोलन
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, अनियमितताओं और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रदर्शन का 14वां दिन रहा। आंदोलन स्थल पर छह प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करना और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराना शामिल है।
छात्रों की मांग है कि जांच सीबीआई या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की समिति के माध्यम से कराई जाए। इसके अलावा वे JPSC और JSSC की भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार की भी मांग कर रहे हैं।
10 अगस्त को विधानसभा घेराव की चेतावनी
आंदोलन के बीच छात्र नेता राधे ने कहा कि छात्र अब तक 14 दिन इंतजार कर चुके हैं और जरूरत पड़ने पर आगे भी लंबे समय तक संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि छात्र अगले छह महीने तक भी इंतजार करने को तैयार हैं, लेकिन 10 अगस्त को राज्यभर के छात्रों द्वारा विधानसभा घेराव किया जाएगा।
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे धरने में विभिन्न क्षेत्रों से लोग छात्रों का समर्थन करने पहुंच रहे हैं। आंदोलन स्थल पर कवि और शायर भी पहुंच रहे हैं और गीत-कविताओं के माध्यम से प्रदर्शन कर रहे युवाओं का हौसला बढ़ा रहे हैं।
छात्र बोलीं- परीक्षाएं देते हैं, लेकिन धांधली हो जाती है
आंदोलन में शामिल छात्रा आरती पांडे ने अपनी परेशानियां साझा करते हुए कहा कि वह पिछले करीब 10 वर्षों से रांची में रह रही हैं। उनके मुताबिक, छात्र लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और परीक्षा देते हैं, लेकिन कथित गड़बड़ियों के कारण उनके प्रयास प्रभावित होते हैं।
आरती ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि छात्रों को रोजगार और कौशल विकास की सलाह दी जाती है, लेकिन जब वे सरकारी भर्ती परीक्षाओं के माध्यम से अवसर तलाशते हैं तो उन्हें कथित अनियमितताओं का सामना करना पड़ता है।
विनय मेहता ने जांच से जुड़े दस्तावेजों का किया जिक्र
धरना स्थल पर मौजूद छात्र विनय मेहता ने भी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कुछ दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया कि सीआईडी की ओर से पेपर में गड़बड़ी को स्वीकार किए जाने से संबंधित जानकारी मौजूद है। उनका आरोप है कि इसके बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
हालांकि, इन दावों से जुड़े दस्तावेजों और उनके कानूनी प्रभाव की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध कराए गए विवरण में नहीं है।
IIT से पढ़ाई के बाद भी सरकारी भर्ती व्यवस्था से निराश जयदेव महतो
आंदोलन में शामिल जयदेव महतो की कहानी भी छात्रों की नाराजगी की एक अलग तस्वीर सामने रखती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जयदेव ने IIT-BHU से MSc और IIT धनबाद से PhD की है। वह आगे की पढ़ाई के लिए न्यूयॉर्क गए थे और वहां रिसर्च साइंटिस्ट के तौर पर काम भी कर चुके हैं।
जयदेव जल विज्ञान के क्षेत्र से जुड़े हैं और उनका कहना है कि वह विदेश में अवसर मिलने के बावजूद भारत लौटकर झारखंड में काम करना चाहते थे। उन्होंने राज्य में पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़ा अपना प्रस्ताव सरकार और अधिकारियों के सामने रखने की बात भी कही, लेकिन उनके मुताबिक उस पर अब तक सुनवाई नहीं हुई।
क्या है छात्रों की मुख्य मांग?
झारखंड छात्र आंदोलन की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद्द की जाए।
- भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच हो।
- जांच सीबीआई या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जजों के पैनल से कराई जाए।
- JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार किया जाए।
- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।
अब बातचीत पर टिकी नजरें
नई डेलीगेशन लिस्ट सौंपे जाने के बाद सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत की संभावना बढ़ी है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि वे सरकार के साथ संवाद के लिए तैयार हैं। दूसरी ओर, आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत कब और किस स्तर पर होती है और क्या इस वार्ता से झारखंड में जारी छात्र आंदोलन का समाधान निकल पाएगा।








