दिल्ली LG वी.के. सक्सेना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और कड़ा संदेश देते हुए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के सहायक अनुभाग अधिकारी (ASO) ऋषि पटेल को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके सफदरजंग एन्क्लेव में 2020 में हुए फर्जी भूखंड आवंटन मामले में की गई है।
एलजी ने इस मामले में पहले भी डीडीए के सहायक निदेशक दिलशाद अहमद को सेवा से बर्खास्त किया था। वहीं, डिप्टी डायरेक्टर परास नाथ (अब सेवानिवृत्त) के मामले में सजा की समीक्षा का आदेश भी दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला 1979 की एक सिफारिशी चिट्ठी से जुड़ा है, जिसके आधार पर स्मृति प्रभा क्षेत्रपाल को वैकल्पिक भूखंड आवंटित किया जाना था।
- वर्ष 1981 में दिल्ली सरकार के भूमि एवं भवन विभाग (L&B) ने डीडीए को सूचित किया था कि इन मामलों में कोई कार्रवाई न की जाए जब तक सचिव या संयुक्त सचिव के हस्ताक्षर से पुष्टि न हो जाए।
- इसके बाद 2020 में अचानक दो ईमेल आए, जिनमें भूखंड के कब्जे की मांग की गई।
- डीडीए ने एल एंड बी विभाग से स्थिति स्पष्ट करने के लिए पत्र लिखा, जिसके जवाब में उन्हें दो अलग-अलग चिट्ठियाँ मिलीं— 23 अक्टूबर और 12 नवंबर 2020 को—जिनमें कहा गया कि अब कार्रवाई की जा सकती है।
डीडीए ने इन पत्रों के आधार पर 5 जनवरी 2021 को भूमि का कब्जा सौंप दिया। लेकिन बाद में शक होने पर एल एंड बी विभाग से दोबारा पुष्टि मांगी गई, जिसके जवाब में 10 मार्च 2021 को विभाग ने बताया कि पहले दिए गए पत्र फर्जी थे और सिफारिशी पत्र भी उनके रिकॉर्ड में नहीं था।
जांच और सख्त कार्रवाई
इस फर्जीवाड़े का पता चलने के बाद 3 जून 2021 को भूखंड आवंटन रद्द कर दिया गया। इसके बाद, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की सलाह पर तीन अधिकारियों के खिलाफ सामूहिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई।
आरोपों में शामिल थे:
- 40 साल पुराने मामले को बिना उचित जांच के तेजी से आगे बढ़ाना, जो मिलीभगत का संकेत था।
- दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की असंगतता को नजरअंदाज करना।
- जरूरी प्रक्रियाओं जैसे पत्रों का डायरी में अंकन, सत्यापन और लेखा अनुभाग से मंजूरी का पालन न करना।
- पहले ही एल एंड बी विभाग द्वारा 128 फर्जी मामलों और 38 संदिग्ध फाइलों की जानकारी दी जा चुकी थी, इसके बावजूद सतर्कता नहीं बरती गई।
एलजी ने सजा की समीक्षा में बढ़ाई कठोरता
इस मामले में ऋषि पटेल द्वारा की गई अपील को खारिज करते हुए एलजी ने सजा को बढ़ाकर सेवा से बर्खास्तगी में बदल दिया।
साथ ही, डिप्टी डायरेक्टर परास नाथ के मामले में, एलजी ने डीडीए कंडक्ट रूल्स के रेगुलेशन 32(G) की समीक्षा करने और कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
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महत्वपूर्ण संदेश: भ्रष्टाचार के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस
दिल्ली के उपराज्यपाल का यह कदम साफ दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीडीए के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह एक मजबूत उदाहरण बनकर सामने आया है।









