गांधी मंडेला फाउंडेशन ने संसद भवन ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में 97वें लोकसभा सचिवालय दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, इतिहास और कला का भव्य प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने रिटायर्ड प्रिंसिपल एवं कैप्टन डॉ. जसबीर कौर गिल को शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक सुधार और राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया।
देशभक्ति की विरासत से प्रेरित जीवन
डॉ. गिल एक ऐसे परिवार से आती हैं, जिसकी पहचान देशभक्ति और बलिदान से जुड़ी रही है। वह महान शहीद शहीद बंता सिंह संघवाल की पौत्री हैं। उनके परिवार ने 1914 से लेकर स्वतंत्रता प्राप्ति तक सात वर्षों का नजरबंदी, यातनाएं और उत्पीड़न सहा। यह देशभक्ति की विरासत उनके व्यक्तित्व और सामाजिक दृष्टिकोण में स्पष्ट दिखाई देती है।

शिक्षा और प्रशासन में 36 वर्षों का अनुभव
डॉ. जसबीर कौर गिल ने 36 वर्षों से अधिक समय तक शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में सेवाएं दी हैं। उन्होंने रामगढ़िया कॉलेज और जंता कॉलेज में प्राचार्य के रूप में कार्य किया। उनके नेतृत्व में संस्थानों में अनुशासन, समावेशिता और मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिला।
उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं और युवाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया, ताकि शिक्षा के साथ-साथ उनमें नैतिक और राष्ट्रीय मूल्यों का भी विकास हो सके। उनके मार्गदर्शन में हजारों छात्र-छात्राएं लाभान्वित हुए हैं।
राजनीतिक विज्ञान की गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. गिल ने एम.ए., एम.फिल. और पीएच.डी. की उपाधियां प्राप्त की हैं। उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्वतंत्रता संग्राम में गदर महिला आंदोलन की भूमिका पर शोध करने वाली पहली भारतीय विद्वान के रूप में मान्यता प्राप्त है। उनका यह शोध ऐतिहासिक और राजनीतिक अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।
स्वास्थ्य सेवाओं और नशामुक्ति अभियान में सक्रिय भूमिका
शिक्षा के अलावा डॉ. गिल स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वह जालंधर (पंजाब) स्थित ऑक्सफोर्ड सुपर-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जंता मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और एक नशामुक्ति केंद्र की प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य कर रही हैं।
उनका जीवन मंत्र—“सेव द यूथ, सेव द नेशन; सेव द वुमन, सेव द क्रिएशन”—उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वह युवाओं को नशे से दूर रखने, महिलाओं के सशक्तिकरण और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।

सामाजिक संस्थाओं से जुड़ाव
डॉ. गिल गांधी मंडेला फाउंडेशन की सक्रिय सदस्य भी हैं, जहां वह नैतिक नेतृत्व, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय विकास के उद्देश्यों के साथ जुड़कर कार्य कर रही हैं।
साथ ही, वह डॉ. जी. एस. गिल फाउंडेशन के माध्यम से वंचित बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा राहत और जागरूकता कार्यक्रम संचालित करती हैं।
मीडिया और लेखन के क्षेत्र में योगदान
1992 से डॉ. गिल एक प्रमुख वक्ता के रूप में टेलीविजन और आकाशवाणी से जुड़ी रही हैं। वह शिक्षा, देशभक्ति, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार जैसे विषयों पर अपने विचार साझा करती रही हैं। 1976 से अब तक उन्होंने कई लेख और पुस्तकें लिखी हैं, जो सामाजिक और बौद्धिक विमर्श में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
लोकसभा सचिवालय की 97वीं वर्षगांठ पर सम्मान
उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्रनिर्माण में दीर्घकालिक सेवाओं को देखते हुए लोकसभा सचिवालय की 97वीं वर्षगांठ के अवसर पर उन्हें सम्मानित किया गया। यह सम्मान ओम बिरला, माननीय लोकसभा अध्यक्ष द्वारा प्रदान किया गया। यह समारोह गांधी मंडेला फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया था, जिसमें राष्ट्रसेवा और नैतिक नेतृत्व के लिए विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया।
राष्ट्रनिर्माण के प्रति समर्पित जीवन
कैप्टन डॉ. जसबीर कौर गिल का जीवन शिक्षा, सेवा और राष्ट्रभक्ति का प्रेरक उदाहरण है। पारिवारिक बलिदान की विरासत और पेशेवर उत्कृष्टता के संगम ने उन्हें समाज में एक सशक्त और संवेदनशील नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया है। युवा सशक्तिकरण, महिला उत्थान और समग्र सामाजिक सुधार के लिए उनका निरंतर प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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इस अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों में अधिवक्ता नंदन झा (महासचिव, जीएमएफ), उत्पल कुमार सिंह (लोकसभा महासचिव) एवं अन्य उपस्थित थें।









