प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने छात्रों से कहा कि संस्थान की परीक्षा और जीवन की परीक्षा में बड़ा अंतर है। IIT में परीक्षा का सिलेबस पहले से तय होता है, लेकिन जिंदगी में परिस्थितियां और चुनौतियां किसी तय पाठ्यक्रम के मुताबिक नहीं आतीं।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन में न कोई निश्चित कोर्स होता है और न ही पहले से तैयार प्रश्न पत्र। कई बार चुनौती के बीच सबसे मुश्किल काम यह समझना होता है कि वास्तविक सवाल क्या है। उन्होंने छात्रों को ऐसी परिस्थितियों में समस्या को पहचानने और उसका समाधान तलाशने की क्षमता विकसित करने की सलाह दी।
‘जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ आउट ऑफ सिलेबस’
प्रधानमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि IIT में पढ़ाई के दौरान परीक्षाओं के लिए सिलेबस निर्धारित होता है, लेकिन कैंपस से बाहर निकलने के बाद जीवन की परिस्थितियां पहले से तय नहीं होतीं।
उन्होंने कहा कि जिंदगी में कई बार न तो प्रश्न पहले से मालूम होता है और न ही यह स्पष्ट होता है कि चुनौती का वास्तविक स्वरूप क्या है। ऐसे में व्यक्ति को खुद समस्या को पहचानना पड़ता है और उसके मुताबिक रास्ता तैयार करना पड़ता है।
पीएम मोदी ने छात्रों को यह संदेश ऐसे समय दिया, जब वे IIT दिल्ली की शैक्षणिक यात्रा पूरी करके व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन के नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं।
‘कैंपस से बाहर की दुनिया अलग होगी’
प्रधानमंत्री ने कहा कि कैंपस की जिंदगी और उससे बाहर की दुनिया के अनुभवों में काफी अंतर होता है। IIT दिल्ली में छात्रों ने निर्धारित पाठ्यक्रम, परीक्षाओं और शैक्षणिक चुनौतियों के बीच अपनी क्षमताओं को विकसित किया है, लेकिन आगे उन्हें कहीं अधिक अनिश्चित परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने छात्रों से कहा कि आने वाले समय में हर व्यक्ति का रास्ता अलग होगा। किसी के सामने नौकरी की चुनौती होगी, कोई नया व्यवसाय शुरू करेगा और कोई अपनी अलग दिशा चुनेगा।
पहली नौकरी से स्टार्टअप तक, छात्रों के अलग-अलग सपने
पीएम मोदी ने दीक्षांत समारोह में मौजूद छात्रों के भविष्य के सपनों का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि कुछ छात्र अपनी पहली नौकरी और पहली सैलरी का इंतजार कर रहे होंगे। कुछ लोग नए शहर में अपनी नई जिंदगी शुरू करने की तैयारी कर रहे होंगे, जबकि कुछ के मन में अपना स्टार्टअप शुरू करने का सपना हो सकता है।
उन्होंने कहा कि रास्ते और लक्ष्य भले ही अलग हों, लेकिन IIT से निकलने का यह अवसर सभी के लिए एक खास अनुभव है।
प्रधानमंत्री ने छात्रों को उनकी नई यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज वे केवल डिग्री लेकर संस्थान से बाहर नहीं जा रहे हैं, बल्कि देश के लिए कुछ करने के सपनों के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
IIT Delhi में AI से जुड़ी नई पहल का भी जिक्र
प्रधानमंत्री ने IIT दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से संबंधित नई पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने संस्थान में शुरू की गई इन पहलों के लिए छात्रों और संस्थान को शुभकामनाएं दीं।
इसी अवसर पर IIT दिल्ली के सोनीपत कैंपस में AI-पावर्ड हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग केंद्र ‘परम प्रज्ञा’ का उद्घाटन भी किया गया।
यह पहल IIT दिल्ली में अत्याधुनिक कंप्यूटिंग और AI से जुड़े शोध एवं तकनीकी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर सामने आई है।
3,000 से ज्यादा छात्रों को मिली डिग्री
IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में 3,000 से अधिक छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 587 पीएचडी स्कॉलर्स भी शामिल रहे।
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने संस्थान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को विभिन्न प्रतिष्ठित अकादमिक सम्मान भी प्रदान किए।
युवाओं को मिला नई शुरुआत का संदेश
IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री मोदी का संदेश मूल रूप से छात्रों को बदलती परिस्थितियों के लिए तैयार रहने पर केंद्रित रहा। उन्होंने संकेत दिया कि प्रतिष्ठित संस्थान से डिग्री हासिल करना उपलब्धि जरूर है, लेकिन असली चुनौती इसके बाद शुरू होने वाली जिंदगी में समस्याओं को समझने और उनके समाधान तलाशने की होगी।
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छात्रों के लिए यह समय एक शैक्षणिक अध्याय के खत्म होने और करियर व जीवन की नई यात्रा शुरू होने का है। पीएम मोदी ने उन्हें इस यात्रा में अपने निर्णय खुद लेने, चुनौतियों को पहचानने और देश के विकास में योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।








