भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा अब उस मुकाम पर पहुंच रही है, जहां देश अपनी चिप निर्माण क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को द्वारका स्थित यशोभूमि में SEMICON India 2026 का उद्घाटन करेंगे। इस आयोजन में दुनिया की प्रमुख सेमीकंडक्टर कंपनियों के प्रतिनिधियों के अलावा निवेशक, नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल होंगे।
तीन दिनों तक चलने वाला यह कार्यक्रम भारत की उस महत्वाकांक्षा को सामने रखेगा, जिसके तहत देश केवल इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबलिंग तक सीमित न रहकर चिप डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग और सप्लाई चेन तक पूरा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है।
‘सिलिकॉन से सिस्टम तक’ है SEMICON India 2026 की थीम
इस वर्ष SEMICON India की थीम “सिलिकॉन से सिस्टम तक: पूरा इकोसिस्टम बनाना” रखी गई है। थीम का फोकस सिर्फ सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन पर नहीं, बल्कि उससे जुड़े पूरे औद्योगिक नेटवर्क पर है।
इसमें चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस पैकेजिंग, टेस्टिंग, उपकरण, कच्चा माल, रिसर्च और कुशल मानव संसाधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
भारत की रणनीति यह है कि अगर देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण स्थान हासिल करना है, तो सिर्फ कुछ फैक्ट्रियां लगाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए चिप के विकास से लेकर अंतिम उपयोग तक जुड़ी कई कड़ियों को देश के भीतर मजबूत करना होगा।
सेमीकंडक्टर क्यों है इतनी बड़ी ताकत?
आज की डिजिटल अर्थव्यवस्था की बुनियाद माइक्रोचिप है। स्मार्टफोन, कार, ड्रोन, विमान, मेडिकल उपकरण, सैटेलाइट और रक्षा प्रणालियों में अलग-अलग तरह के सेमीकंडक्टर इस्तेमाल होते हैं।
एक आधुनिक चिप के बेहद छोटे आकार में अरबों ट्रांजिस्टर फिट किए जा सकते हैं। यही ट्रांजिस्टर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को गणना, प्रोसेसिंग और नियंत्रण जैसी क्षमताएं देते हैं।
इसी वजह से सेमीकंडक्टर उद्योग को रणनीतिक और आधारभूत उद्योग माना जाता है। चिप की सप्लाई प्रभावित होने पर इसका असर ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और कई अन्य क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक चिप संकट ने इसकी अहमियत को और स्पष्ट किया था। सेमीकंडक्टर की कमी के कारण दुनिया के कई हिस्सों में ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन प्रभावित हुआ। इसके बाद प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने घरेलू चिप निर्माण क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग ने तैयार किया सेमीकंडक्टर के लिए आधार
भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रवेश अचानक लिया गया फैसला नहीं है। पिछले वर्षों में देश ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का आधार मजबूत किया है।
2014-15 में भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 तक बढ़कर करीब 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया।
इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
मोबाइल फोन निर्माण में भी बड़ा बदलाव आया। मोबाइल फोन का उत्पादन करीब 18,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं मोबाइल फोन का निर्यात लगभग 1,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
भारत में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोन का लगभग 99.2 प्रतिशत हिस्सा अब देश में ही निर्मित होता है। इस बदलाव ने भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अब चिप निर्माण पर सरकार का फोकस
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार के बाद सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अलग रणनीति तैयार की।
2021 में शुरू किए गए सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत सरकार ने सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन विकसित करने के लिए 76,000 करोड़ रुपये के प्रावधान की दिशा में कदम बढ़ाया। इसका लक्ष्य केवल फैब्रिकेशन यूनिट लगाना नहीं था, बल्कि डिजाइन, पैकेजिंग, टेस्टिंग, उपकरण, सामग्री और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों को भी साथ लेकर चलना था।
इसके बाद जुलाई 2026 में सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी गई, जिसके लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इस दूसरे चरण में छह प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है:
सेमीकंडक्टर डिजाइन
निर्माण उपकरण और जरूरी सामग्री
चिप फैब्रिकेशन यूनिट
एडवांस पैकेजिंग
रिसर्च एंड डेवलपमेंट
कुशल सेमीकंडक्टर प्रतिभा का विकास
छह राज्यों में 12 परियोजनाओं को मंजूरी
सरकार की योजना अब जमीन पर परियोजनाओं के रूप में भी दिखाई दे रही है। छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता बताई गई है।
इन परियोजनाओं में सिलिकॉन और कंपाउंड सेमीकंडक्टर निर्माण, डिस्प्ले निर्माण और आधुनिक पैकेजिंग जैसी क्षमताओं का विकास शामिल है।
इनमें से तीन इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होना इस क्षेत्र के लिए खास महत्व रखता है। इससे संकेत मिलता है कि भारत की सेमीकंडक्टर नीति अब निवेश प्रस्तावों से आगे बढ़कर वास्तविक उत्पादन क्षमता बनाने की दिशा में जा रही है।
चिप डिजाइन में भी भारत बढ़ा रहा अपनी क्षमता
सेमीकंडक्टर उद्योग में सिर्फ फैक्ट्री महत्वपूर्ण नहीं होती। चिप की डिजाइनिंग भी उतनी ही अहम कड़ी है। इसी कारण भारत ने इंजीनियरों और डिजाइन विशेषज्ञों की नई प्रतिभा तैयार करने पर भी जोर दिया है।
सरकार का लक्ष्य इस दशक के भीतर 85,000 कुशल सेमीकंडक्टर इंजीनियर तैयार करना है।
‘चिप्स टू स्टार्टअप’ यानी C2S कार्यक्रम के तहत इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) से जुड़े सॉफ्टवेयर और टूल्स 320 शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाए गए हैं। अब तक 68,000 से ज्यादा छात्रों को प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी है।
वहीं, 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को आर्थिक सहायता के लिए मंजूरी दी गई है। DLI योजना के अंतर्गत 105 स्टार्टअप और छोटे-मझोले उद्यमों को EDA टूल्स के इस्तेमाल के लिए सहायता मिली है।
211 चिप डिजाइन टेप-आउट तक पहुंचे
अप्रैल 2026 तक 75 संस्थानों की ओर से 211 चिप डिजाइन तैयार कर उन्हें टेप-आउट चरण तक पहुंचाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें 12 नैनोमीटर तक की तकनीक पर आधारित डिजाइन भी शामिल हैं।
इनमें से सात चिप्स को अलग-अलग तकनीकी स्तरों पर निर्मित किए जाने की जानकारी दी गई है।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन की गतिविधियां अब कुछ बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं हैं। विश्वविद्यालय, स्टार्टअप और दूसरे संस्थान भी इस नेटवर्क का हिस्सा बन रहे हैं।
ChipIN Centre से स्टार्टअप और संस्थानों को मदद
देश में चिप डिजाइन की साझा सुविधाओं को बढ़ाने के लिए C-DAC के तहत ChipIN Centre स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य संस्थानों, स्टार्टअप और इंजीनियरों को महंगे डिजाइन टूल्स और अन्य तकनीकी संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराना है।
इस सुविधा का इस्तेमाल 500 से ज्यादा संस्थानों के एक लाख से अधिक इंजीनियरों द्वारा किए जाने की जानकारी है। इनमें करीब 400 शैक्षणिक संस्थान और 100 स्टार्टअप शामिल हैं।
इन संस्थानों ने 300 से ज्यादा चिप डिजाइन तैयार किए हैं। इन डिजाइन को निर्माण के लिए मोहाली स्थित SCL और विदेशों की फैब्रिकेशन सुविधाओं तक भेजा गया है।
वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भारत की भूमिका
भारत की रणनीति सिर्फ घरेलू उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर और सिलिकॉन सप्लाई चेन को मजबूत बनाने की कोशिशों में भी भारत की भागीदारी बढ़ रही है।
भारत का Pax Silica गठबंधन में शामिल होना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य सिलिकॉन, सेमीकंडक्टर और उनसे जुड़ी तकनीकी सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।
ऐसे वैश्विक सहयोग भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आधुनिक अर्थव्यवस्था में चिप निर्माण केवल एक देश की क्षमता का विषय नहीं है। इसमें खनिज, सामग्री, डिजाइन, उपकरण, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और अंतिम सिस्टम—सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं।
SEMICON India 2026 में दिखेगी पूरी इंडस्ट्री की तस्वीर
यशोभूमि में होने वाला SEMICON India 2026 इसी पूरे बदलाव को प्रदर्शित करने का मंच बनेगा। आयोजन में 600 से अधिक प्रदर्शकों और 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की भागीदारी बताई गई है।
करीब 15,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में लगने वाले इस आयोजन में 150 से अधिक वक्ताओं के शामिल होने की उम्मीद है। छह देशों और 12 राज्यों के पवेलियन के साथ स्टार्टअप, छात्र, तकनीकी प्रतिभा और महिला पेशेवरों से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
भारत की अगली तकनीकी छलांग कितनी बड़ी होगी?
भारत ने पिछले एक दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में उल्लेखनीय विस्तार किया है। अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र उस यात्रा का अगला और कहीं अधिक जटिल चरण है।
चिप उद्योग में सफलता के लिए पूंजी, अत्याधुनिक तकनीक, विश्वसनीय बिजली-पानी की व्यवस्था, कुशल इंजीनियर, रिसर्च क्षमता और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ाव—इन सभी की जरूरत होती है।
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SEMICON India 2026 इसलिए सिर्फ एक इंडस्ट्री इवेंट नहीं, बल्कि भारत की उस दीर्घकालिक रणनीति का प्रदर्शन है जिसमें देश चिप का उपभोक्ता और असेंबलर भर नहीं, बल्कि डिजाइन और निर्माण की वैश्विक वैल्यू चेन का अहम हिस्सा बनने की कोशिश कर रहा है।







