सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत 135 साल पुराने केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय के स्थानांतरण और वहां रखी लाखों किताबों के भविष्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। न्यायालय ने केंद्र सरकार से पुस्तकालय के लिए तय किए गए स्थान का पूरा विवरण और वास्तविक नक्शा पेश करने को कहा है।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें यह बताना होगा कि नए पुस्तकालय के लिए कितनी जगह उपलब्ध कराई गई है और क्या वह वर्तमान संग्रह के साथ-साथ दिल्ली के आरके पुरम में वर्षों से रखी करीब दो लाख किताबों के लिए भी पर्याप्त होगी।
पुस्तकालय के लिए कितनी जगह है, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा स्पष्ट जवाब
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि सेंट्रल विस्टा योजना में केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय के लिए जगह निर्धारित की गई है।
इसके बाद न्यायालय ने सरकार से केवल मौखिक जानकारी के बजाय जगह का पूरा क्षेत्रफल और वास्तविक नक्शा हलफनामे के साथ प्रस्तुत करने को कहा। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि नए स्थान की क्षमता का आकलन केवल वर्तमान पुस्तकालय में मौजूद पुस्तकों के आधार पर नहीं होना चाहिए, बल्कि आरके पुरम में रखी करीब दो लाख पुस्तकों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि कर्तव्य पथ पुनर्विकास योजना में केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय के लिए जगह निर्धारित की गई है और इसके निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया चल रही है।
1891 में शुरू हुआ था पुस्तकालय
केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय की शुरुआत 1891 में कलकत्ता में इंपीरियल सचिवालय पुस्तकालय के रूप में हुई थी। वर्ष 1911 में राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद पुस्तकालय भी दिल्ली आ गया।
वर्तमान में यह पुस्तकालय शास्त्री भवन में संचालित होता है और इसमें 8.5 लाख से अधिक पुस्तकें और अन्य सामग्री मौजूद है। इनमें दुर्लभ पुस्तकें, सरकारी प्रकाशन, आधिकारिक अभिलेख और विभिन्न विषयों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं।
करीब 8.5 लाख पुस्तकों की सुरक्षा का सवाल
केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय केवल सामान्य पुस्तकों का संग्रह नहीं है। यहां सरकार के आधिकारिक प्रकाशनों, विभिन्न मंत्रालयों की रिपोर्टों, राजकीय दस्तावेजों और ऐतिहासिक सामग्री का बड़ा संग्रह मौजूद है।
इसके अलावा इतिहास, भूगोल, प्रशासन और अलग-अलग राज्यों तथा क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री भी यहां सुरक्षित है। शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों और सरकारी अधिकारियों के लिए यह पुस्तकालय लंबे समय से महत्वपूर्ण स्रोत रहा है।
इसी वजह से पुस्तकालय को स्थानांतरित करते समय केवल नई इमारत में जगह उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि पूरे संग्रह की सुरक्षित और व्यवस्थित व्यवस्था करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आरके पुरम में रखी हैं करीब दो लाख किताबें
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने आरके पुरम में रखी करीब दो लाख पुस्तकों का भी मुद्दा उठाया। ये किताबें लंबे समय से डिब्बों में रखी हुई हैं।
न्यायालय ने केंद्र से पूछा है कि नए पुस्तकालय में वर्तमान संग्रह के अलावा इन पुस्तकों को रखने के लिए भी पर्याप्त जगह होगी या नहीं। अदालत के निर्देश में इस बात को हलफनामे में स्पष्ट करने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की सुनवाई
केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय से जुड़े मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया है। यह मामला पुस्तकालय के स्थानांतरण और सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के बीच इसके भविष्य को लेकर उठी चिंताओं के बाद सामने आया।
न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता हरिप्रिया पद्मनाभन को भी मामले में अदालत की सहायता करने के लिए नियुक्त किया है।
अब केंद्र सरकार को देना होगा पूरा ब्योरा
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अब केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करना होगा कि केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय के लिए वास्तव में कितनी जगह उपलब्ध है, उसका पूरा नक्शा क्या है और क्या वहां लाखों पुस्तकों को सुरक्षित तरीके से रखा जा सकेगा।
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खास तौर पर शास्त्री भवन में मौजूद 8.5 लाख से अधिक पुस्तकों और आरके पुरम में रखी करीब दो लाख पुस्तकों के लिए पर्याप्त व्यवस्था का सवाल इस मामले के केंद्र में है।









