मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके कामकाज पर तत्काल रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में भारत निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।
फैसलों में सर्वसम्मति का मुद्दा
याचिका में मुख्य रूप से यह सवाल उठाया गया है कि क्या भारत निर्वाचन आयोग से संबंधित सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले कर सकते हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण सहित कई मामलों में अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद फैसले लिए गए।
मामले में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कथित तौर पर दर्ज की गई आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। याचिका में अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच ऐसे करीब 14 मामलों का हवाला दिया गया है। हालांकि, इन आरोपों की अभी न्यायालय ने पुष्टि नहीं की है।
संशोधित प्रपत्र-6 पर भी सवाल
मामले का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रपत्र-6 में किए गए बदलाव से जुड़ा है। याचिका में दावा किया गया है कि इस प्रपत्र के साथ विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित अतिरिक्त जानकारी मांगी गई थी और इस बदलाव को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद थे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान संशोधित प्रपत्र-6 को लेकर स्पष्ट टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “संशोधित प्रपत्र-6 को हमने मंजूरी नहीं दी है, यह बिल्कुल स्पष्ट है।”
इससे पहले चुनाव आयोग ने कहा था कि संबंधित निर्णयों को आयोग के सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से लिया गया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि कुछ मुद्दों पर अलग-अलग विचार सामने आना अंतिम निर्णय पर असहमति के समान नहीं है।
जरूरत पड़ी तो फैसलों पर फिर विचार
सुनवाई के दौरान पीठ ने संकेत दिया कि यदि चुनाव आयोग अपने जवाब में यह स्पष्ट करता है कि कुछ फैसले आवश्यक सर्वसम्मति के बिना लिए गए थे, तो सर्वोच्च न्यायालय उन फैसलों पर दोबारा विचार कर सकता है।
पीठ ने संकेत दिया कि चुनाव आयोग का जवाब मिलने के बाद यदि यह सामने आता है कि संबंधित निर्णय निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं लिए गए थे, तो न्यायालय उन निर्णयों को वापस लेने या उन पर पुनर्विचार करने का आदेश दे सकता है।
चुनाव आयोग से मांगा गया जवाब
फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय ने मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने या उनके कामकाज पर रोक लगाने का कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है। अब मामले में चुनाव आयोग का जवाब महत्वपूर्ण होगा।
यह भी पढ़ें: सेंट्रल विस्टा में 135 साल पुराने पुस्तकालय को लेकर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, केंद्र से मांगा पूरा ब्योरा
याचिका में चुनाव आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया, प्रपत्र-6 में बदलाव, मतदाता सूची से संबंधित आंकड़ों के प्रबंधन और कुछ अन्य प्रशासनिक फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। न्यायालय इन दावों पर चुनाव आयोग का पक्ष सुनने के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।









