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UPI Payment Rule: UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज या नहीं, जानिए पूरा मामला

UPI Payment Rule: अगर आप रोजाना UPI से पेमेंट करते हैं तो 2000 रुपये की नई सीमा को समझना आपके लिए जरूरी है। केंद्र सरकार ने 14 सितंबर 2026 को इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट से जुड़ा नया गजट नोटिफिकेशन जारी किया है।

Gautam Rishi by Gautam Rishi
15 September 2026
in बिज़नेस
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व्यक्तिगत लेन-देन अभी भी निःशुल्क, ₹2,000 से अधिक के व्यापारिक लेन-देन पर शुल्क लागू - Panchayati Times

UPI Payment Rule

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UPI Payment Rule: अगर आप रोजाना UPI से पेमेंट करते हैं तो 2000 रुपये की नई सीमा को समझना आपके लिए जरूरी है। केंद्र सरकार ने 14 सितंबर 2026 को इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट से जुड़ा नया गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके बाद UPI के 2000 रुपये तक के लेनदेन को बिना शुल्क वाले इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यम के तौर पर स्पष्ट किया गया है।

हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि 2000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर अब चार्ज लगना शुरू हो गया है। फिलहाल UPI पेमेंट पर कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। असल बदलाव यह है कि 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन अब उस विशेष कानूनी सुरक्षा के दायरे में नहीं आते, जिसके तहत उन पर चार्ज लगाने की मनाही थी।

क्या है UPI का नया नियम?

सरकार के नए नोटिफिकेशन में दो इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यमों को बिना चार्ज वाले माध्यम के तौर पर निर्धारित किया गया है।

  • RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले पेमेंट

  • 2000 रुपये तक के UPI लेनदेन

नोटिफिकेशन के मुताबिक, बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर इन माध्यमों से भुगतान करने या प्राप्त करने पर किसी व्यक्ति से सीधे या अप्रत्यक्ष तरीके से कोई चार्ज नहीं ले सकते।

यही वजह है कि 2000 रुपये की सीमा महत्वपूर्ण हो गई है। इससे अधिक रकम वाले UPI ट्रांजैक्शन इस खास कानूनी सुरक्षा के दायरे से बाहर हो गए हैं।

क्या 2000 रुपये से ज्यादा UPI पेमेंट पर अभी फीस लगेगी?

नहीं।

यह इस पूरे बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। नए नोटिफिकेशन में 2000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट के लिए कोई नई फीस या शुल्क दर तय नहीं की गई है।

उदाहरण के लिए, अगर आप आज 5000 रुपये का UPI पेमेंट करते हैं तो केवल इस नोटिफिकेशन के कारण आपके बैंक खाते से अतिरिक्त रकम नहीं काटी जाएगी।

फिलहाल बदलाव को इस तरह समझा जा सकता है कि सरकार ने बड़े UPI लेनदेन पर भविष्य में शुल्क लागू किए जाने की संभावना के लिए कानूनी आधार तैयार किया है। फीस लगेगी या नहीं, कितनी होगी और किन लेनदेन पर लागू होगी, इसका अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।

2000 रुपये की सीमा क्यों लाई गई?

इस बदलाव को समझने के लिए 2019 के नियम पर नजर डालना जरूरी है।

30 दिसंबर 2019 के नोटिफिकेशन के तहत UPI पेमेंट को जीरो-चार्ज इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यम के रूप में सुरक्षा दी गई थी। उस समय किसी खास ट्रांजैक्शन वैल्यू की सीमा निर्धारित नहीं थी।

यानी 100 रुपये और 50,000 रुपये के UPI पेमेंट दोनों इस कानूनी सुरक्षा के तहत आते थे।

अब नए नोटिफिकेशन में पहली बार 2000 रुपये की सीमा जोड़ी गई है। इसका सीधा मतलब है कि 2000 रुपये तक के UPI पेमेंट पर पहले की तरह शुल्क नहीं लगाया जा सकता, जबकि इससे अधिक के ट्रांजैक्शन इस विशेष सुरक्षा से बाहर हैं।

क्या UPI का चार्ज ग्राहक से वसूला जाएगा?

अभी ऐसा कोई नया चार्ज ग्राहक पर लागू नहीं किया गया है।

सरकार की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, अगर भविष्य में UPI पर शुल्क व्यवस्था लागू होती है तो उसका संभावित बोझ ग्राहक के बजाय मर्चेंट यानी दुकानदार या कारोबारी पर डाला जा सकता है।

इसे एक उदाहरण से समझें। मान लीजिए किसी दुकान पर आपने 5000 रुपये का UPI भुगतान किया। यदि भविष्य में इस तरह के कारोबारी लेनदेन पर MDR लागू होता है, तो संभावित शुल्क पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारी से लिया जा सकता है, न कि सीधे ग्राहक से।

MDR क्या होता है?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो किसी कारोबारी को डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले बैंक, पेमेंट नेटवर्क या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देना पड़ता है।

डेबिट और क्रेडिट कार्ड पेमेंट में MDR जैसी व्यवस्था पहले से मौजूद है। हालांकि दिसंबर 2019 से UPI पेमेंट पर ऐसी फीस व्यवस्था खत्म थी।

नए बदलाव के बाद बड़े UPI लेनदेन को कानूनी सुरक्षा से बाहर किए जाने के कारण भविष्य में चुनिंदा कारोबारी लेनदेन पर MDR जैसी व्यवस्था की संभावना बन गई है।

क्या हर 2000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर फीस लगेगी?

अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा।

नए नोटिफिकेशन में यह नहीं कहा गया है कि 2001 रुपये, 5000 रुपये या 10,000 रुपये के हर UPI भुगतान पर शुल्क लगेगा।

सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि अगर शुल्क व्यवस्था लाई जाती है तो यह एक निर्धारित सीमा से ऊपर होने वाले चुनिंदा कारोबारी लेनदेन पर लागू हो सकती है।

व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P ट्रांजैक्शन को मुफ्त रखने की बात भी सामने आई है। इसलिए अभी यह मान लेना गलत होगा कि 2001 रुपये का UPI भुगतान करते ही आपके खाते से कोई अतिरिक्त शुल्क कट जाएगा।

UPI पर कितनी फीस लग सकती है?

फिलहाल किसी तरह की अंतिम फीस दर तय नहीं की गई है।

इंडस्ट्री से जुड़े अनुमानों में संभावित MDR करीब 25 से 40 बेसिस पॉइंट के बीच रहने की बात कही गई है। अगस्त में 2000 रुपये या उससे अधिक के कुछ लेनदेन पर करीब 0.3 प्रतिशत शुल्क की संभावना को लेकर भी रिपोर्ट सामने आई थी।

लेकिन इन आंकड़ों को मौजूदा UPI शुल्क नहीं माना जा सकता। जब तक आधिकारिक तौर पर दर और लागू होने वाली शर्तें तय नहीं होतीं, तब तक इन्हें केवल संभावित अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

ब्रोकरेज फर्म Jefferies के अगस्त के अनुमान के अनुसार, यदि बड़े UPI लेनदेन पर मर्चेंट से शुल्क लेने की व्यवस्था लागू होती है तो पेमेंट इंडस्ट्री को सालाना करीब 5,000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त आय हो सकती है।

अंतिम शुल्क ढांचा और उसकी दर पर फैसला संबंधित UPI व्यवस्था के तहत आगे किया जाना है।

नए नोटिफिकेशन में क्या बातें अभी साफ नहीं हैं?

नए नियम को लेकर कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अभी स्पष्ट नहीं हैं।

  • नोटिफिकेशन में इसके लागू होने की स्पष्ट तारीख नहीं बताई गई है।

  • 2019 के पुराने नोटिफिकेशन को सीधे तौर पर रद्द करने का उल्लेख नहीं है।

  • नए प्रावधान में P2P और P2M UPI पेमेंट का अलग-अलग स्पष्ट वर्गीकरण नहीं किया गया है।

  • पुराने नोटिफिकेशन में BHIM UPI QR Code का विशेष उल्लेख था, जबकि नए नोटिफिकेशन में ऐसा स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

इसलिए केवल नोटिफिकेशन जारी होने के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि UPI पर शुल्क व्यवस्था तत्काल लागू हो गई है।

आम UPI यूजर पर अभी क्या असर पड़ेगा?

फिलहाल आम यूजर के लिए UPI इस्तेमाल करने का तरीका नहीं बदला है।

अगर आपको 50 रुपये की चाय का भुगतान करना है, 1500 रुपये का किराना खरीदना है या किसी व्यक्ति को 5000 रुपये भेजने हैं, तो सिर्फ नए नोटिफिकेशन की वजह से कोई नई UPI फीस नहीं लगेगी।

सीधी बात: 2000 रुपये तक के UPI पेमेंट को स्पष्ट कानूनी शुल्क-मुक्त सुरक्षा मिली है। 2000 रुपये से अधिक के लेनदेन को उस विशेष सुरक्षा से बाहर किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उन पर आज से फीस लगनी शुरू हो गई है।

भविष्य में अगर बड़े कारोबारी UPI ट्रांजैक्शन पर MDR या कोई अन्य शुल्क व्यवस्था लागू की जाती है, तभी इसका वास्तविक वित्तीय असर सामने आएगा।

UPI New Rule: 5 बड़ी बातें

  1. 2000 रुपये तक के UPI पेमेंट पर इस कानूनी प्रावधान के तहत शुल्क नहीं लगाया जा सकता।

  2. 2000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर अभी कोई नई फीस लागू नहीं हुई है।

  3. बड़े UPI कारोबारी लेनदेन को भविष्य के संभावित शुल्क ढांचे के लिए कानूनी सुरक्षा से बाहर किया गया है।

  4. संभावित MDR का बोझ ग्राहक के बजाय मर्चेंट पर पड़ने की संभावना बताई गई है।

  5. शुल्क की दर, दायरा और लागू होने की तारीख अभी अंतिम रूप से तय नहीं है।

यह भी पढ़ें: SEMICON India 2026: दुनिया भर की चिप कंपनियों का होगा जमावड़ा, पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन

नए UPI नियम को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि 2000 रुपये की सीमा को नई UPI फीस की शुरुआत समझना गलत होगा। सरकार ने फिलहाल 2000 रुपये तक के UPI लेनदेन को शुल्क-मुक्त कानूनी सुरक्षा के दायरे में रखा है और इससे बड़े लेनदेन को उस सुरक्षा से बाहर किया है।

इसका मतलब है कि भविष्य में बड़े कारोबारी UPI भुगतान पर शुल्क लगाने का रास्ता खुला है, लेकिन अभी 2000 रुपये से ज्यादा का UPI भुगतान करने पर ग्राहक से कोई नया चार्ज नहीं लिया जा रहा है।

Tags: UPI PaymentUPI Payment New RuleUPI Payment Rule
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