नोएडा फेस-2 में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों का वेतन वृद्धि को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन सोमवार को अचानक उग्र हो गया। पिछले तीन दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे श्रमिकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
प्रदर्शन हुआ हिंसक, यातायात प्रभावित
सोमवार को बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए श्रमिकों ने हंगामा करते हुए कई जगहों पर तोड़फोड़ की। गाड़ियों और फैक्ट्री परिसरों को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। स्थिति को काबू में करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। कई इलाकों में पथराव और आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं।
क्या हैं श्रमिकों की मुख्य मांगें?
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर कंपनी प्रबंधन और प्रशासन के सामने गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर ₹18,000–₹20,000 किया जाए
- समय पर बोनस का भुगतान किया जाए
- ओवरटाइम का भुगतान दोगुना किया जाए
- कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए
- आठ घंटे की ड्यूटी के दौरान बेहतर भोजन की व्यवस्था हो
श्रमिकों का आरोप है कि उन्हें वर्तमान में करीब ₹11,000 मासिक वेतन दिया जा रहा है, जो बढ़ती महंगाई के मुकाबले बेहद कम है।
“महंगाई में गुजारा मुश्किल”
मीडिया से बातचीत में कर्मचारियों ने बताया कि किराया, गैस और खाने-पीने के बढ़ते खर्च के बीच मौजूदा वेतन में गुजारा करना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक विरोध जारी रहेगा।
सरकार ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 24 घंटे के भीतर समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाए और श्रमिकों को सम्मानजनक वेतन दिलाया जाए।
साथ ही भड़काऊ गतिविधियों पर नजर रखने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की सख्ती
नोएडा डीएम मेधा रूपम ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन दिया जाए और श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
डीएम ने यह भी निर्देश दिया कि कर्मचारियों को हर महीने की 10 तारीख तक वेतन मिलना चाहिए और तय समयसीमा के भीतर बोनस भी उनके खातों में भेजा जाए।
स्थिति पर नजर
फिलहाल इलाके में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है और हालात को काबू में करने की कोशिश जारी है। प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के बीच बातचीत की उम्मीद है, जिससे जल्द समाधान निकल सके।
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यह घटना एक बार फिर श्रमिकों की आर्थिक स्थिति और श्रम कानूनों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।









