Exam Reforms Task Force: नीट परीक्षा में हुई अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए एग्जाम रिफॉर्म्स टास्क फोर्स का गठन किया है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में गठित यह समिति राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेगी और भविष्य में किसी भी तरह की परीक्षा गड़बड़ी को रोकने के लिए व्यापक सुधारों की सिफारिश करेगी।
इस उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का नेतृत्व इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी कर रहे हैं। समिति में शिक्षा, प्रशासन, साइबर सुरक्षा और डिजिटल तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
नंदन नीलेकणी को क्यों सौंपी गई जिम्मेदारी?
भारत के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में शामिल नंदन नीलेकणी को बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का लंबा अनुभव है। वे देश की डिजिटल पहचान प्रणाली आधार (UIDAI) के पहले अध्यक्ष रह चुके हैं और बड़े पैमाने पर सुरक्षित डिजिटल ढांचा तैयार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
सरकार को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीकों का बेहतर उपयोग होगा, जिससे प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की पहचान और परीक्षा संचालन को अधिक विश्वसनीय बनाया जा सकेगा।
टास्क फोर्स में कौन-कौन शामिल हैं?
इस समिति में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, जिनमें प्रमुख नाम हैं—
- नंदन नीलेकणी – अध्यक्ष, तकनीकी विशेषज्ञ एवं इन्फोसिस के सह-संस्थापक
- प्रो. वी. कामकोटी – निदेशक, आईआईटी मद्रास
- अनीता करवाल – पूर्व सीबीएसई अध्यक्ष एवं पूर्व स्कूल शिक्षा सचिव
- अमृत लाल मीणा – वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं बिहार के पूर्व मुख्य सचिव
इसके अलावा परीक्षा प्रबंधन, डिजिटल सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े अन्य विशेषज्ञ भी इस पैनल का हिस्सा हैं।
डिजिटल सुरक्षा और AI पर रहेगा विशेष फोकस
सरकार चाहती है कि भविष्य की परीक्षाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा और आधुनिक डिजिटल तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाए।
संभावित सुधारों में शामिल हो सकते हैं—
- प्रश्नपत्रों की सुरक्षित डिजिटल निगरानी
- अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था
- परीक्षा केंद्रों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग
- डिजिटल क्वेश्चन बैंक की सुरक्षा
- डेटा चोरी और हैकिंग से बचाव के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा प्रणाली
इन उपायों का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली अन्य अनियमितताओं की संभावना को कम करना है।
प्रो. वी. कामकोटी की क्या होगी भूमिका?
आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी साइबर सुरक्षा और कंप्यूटर सिस्टम के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे एनटीए के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक सुरक्षित बनाने और परीक्षा से जुड़े ऑनलाइन सिस्टम को साइबर हमलों से बचाने के लिए तकनीकी सुझाव देंगे।
प्रशासनिक अनुभव भी आएगा काम
पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और वरिष्ठ प्रशासक अमृत लाल मीणा जैसे अधिकारियों का अनुभव परीक्षा प्रणाली के प्रशासनिक और नीतिगत सुधारों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इनका फोकस परीक्षा संचालन, जवाबदेही, पारदर्शिता और प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर रहेगा।
टास्क फोर्स की प्रमुख जिम्मेदारियां
सरकार की ओर से गठित यह समिति कई अहम बिंदुओं पर काम करेगी—
- एनटीए की कार्यप्रणाली की समीक्षा
- प्रश्नपत्र तैयार करने से परीक्षा केंद्र तक पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना
- परीक्षा संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने के उपाय सुझाना
- डिजिटल और साइबर सुरक्षा मानकों को मजबूत करना
- भविष्य के लिए नई परीक्षा सुधार नीति का खाका तैयार करना
- पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालिक समाधान देना
नंदन नीलेकणी कौन हैं?
नंदन मोहनराव नीलेकणी भारत के प्रमुख उद्योगपति और तकनीकी विशेषज्ञ हैं। उनका जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और 1981 में एन. आर. नारायण मूर्ति के साथ मिलकर इन्फोसिस की स्थापना की।
साल 2009 में उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का पहला अध्यक्ष बनाया गया, जहां उन्होंने आधार परियोजना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डिजिटल गवर्नेंस और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में उनका अनुभव इस टास्क फोर्स की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।
क्या बदल सकती है देश की परीक्षा व्यवस्था?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टास्क फोर्स की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में एनटीए की परीक्षा प्रणाली पहले से अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित हो सकती है। इससे छात्रों का भरोसा मजबूत होगा और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।
यह भी पढ़ें: यूनिवर्सिटी को गिराया जाना मतलब शिक्षा को कुचलना: CJP
नीट परीक्षा विवाद के बाद गठित एग्जाम रिफॉर्म्स टास्क फोर्स को देश की परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली यह समिति तकनीक, प्रशासन और शिक्षा क्षेत्र के अनुभव को साथ लेकर ऐसी सिफारिशें तैयार करेगी, जिनका उद्देश्य भविष्य में परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाना है।








