Paper Leak Bill Debate: पेपर लीक रोकने से जुड़े विधेयक पर लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर कई सवाल उठाए। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उनके कुछ बयानों पर आपत्ति जताई और उन्हें रिकॉर्ड से हटाने की मांग की।
घायल छात्रों का किया जिक्र
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्होंने अस्पताल जाकर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने दावा किया कि कई छात्र और उनके परिजन पुलिस कार्रवाई से आहत हैं और इस पूरे मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और इस संबंध में गृह मंत्रालय को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान बल प्रयोग किया गया और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है और विरोध प्रदर्शन पर की गई कार्रवाई को लेकर जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संसद जनता की संस्था है और निर्वाचित प्रतिनिधियों का दायित्व नागरिकों की चिंताओं को सरकार तक पहुंचाना है।
शिक्षा व्यवस्था और एनटीए पर निशाना
प्रियंका गांधी ने कहा कि देश में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। उनके अनुसार, केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक संस्थागत सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।
उन्होंने शिक्षा बजट, परीक्षा प्रणाली के केंद्रीकरण और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
नई समिति के गठन पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद ने कहा कि केवल नई समितियों का गठन करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सरकार से पूछा कि पहले गठित समितियों की सिफारिशों पर क्या कार्रवाई हुई और उनके परिणाम क्या रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा सुधार के लिए बनाई गई समितियों में विषय विशेषज्ञों की भूमिका और उनकी योग्यता पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
नए शिक्षा मंत्री को लेकर टिप्पणी पर सदन में हंगामा
बहस के दौरान प्रियंका गांधी ने नए शिक्षा मंत्री को लेकर भी टिप्पणी की, जिस पर सत्तापक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बिना प्रमाण किसी व्यक्ति पर इस प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है।
उन्होंने इसे व्यक्तिगत टिप्पणी बताते हुए कहा कि यदि आरोपों की पुष्टि नहीं की जा सकती, तो इस तरह के बयान से बचना चाहिए और इसे सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।
किरेन रिजिजू का पलटवार
किरेन रिजिजू ने कहा कि संसद में बहस का स्तर बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रियंका गांधी से जिम्मेदारी के साथ बोलने की अपील की और कहा कि तथ्य आधारित चर्चा लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप होती है।
बहस के दौरान उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि प्रियंका गांधी का भाषण कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पूर्व भाषण से मिलता-जुलता था।
पेपर लीक कानून पर विपक्ष के सवाल
प्रियंका गांधी ने कहा कि पेपर लीक से संबंधित कानून पहले भी पारित किया जा चुका है, लेकिन अब तक दोषियों के खिलाफ अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई दिखाई नहीं दी। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि कानून मौजूद है, तो उसके प्रभावी क्रियान्वयन में देरी क्यों हो रही है।
उन्होंने छात्रों के भविष्य, परीक्षा प्रणाली में विश्वास और शिक्षा सुधार को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए लगातार संस्थागत सुधार किए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार, नए प्रावधानों और परीक्षा सुधार उपायों का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
पेपर लीक विधेयक पर लोकसभा में हुई चर्चा के दौरान शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और परीक्षा सुधार जैसे कई अहम मुद्दे सामने आए। विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही और व्यापक सुधारों की मांग की, जबकि सरकार ने अपने कदमों को परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में आवश्यक बताया। आने वाले समय में इस विधेयक और प्रस्तावित सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन पर सभी की नजर रहेगी।








