बिहार की राजनीति में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। माना जा रहा है कि यह फैसला राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और राज्य के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का मंत्री पद बरकरार रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
क्यों जरूरी था दीपक प्रकाश का एमएलसी बनना?
बिहार सरकार में मंत्री बने रहने के लिए संविधान के अनुसार किसी व्यक्ति को निर्धारित समय सीमा के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना आवश्यक होता है। दीपक प्रकाश को 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद मंत्री बनाया गया था, लेकिन वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। ऐसे में उनका विधान परिषद पहुंचना आवश्यक माना जा रहा था।
बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे से अब एक सीट खाली हो गई है, जिस पर दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजे जाने की तैयारी शुरू हो गई है।
देवेश कुमार का इस्तीफा सभापति को सौंपा गया
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने विधान परिषद के सभापति को देवेश कुमार का इस्तीफा सौंपा। इस दौरान देवेश कुमार भी मौजूद रहे। इस्तीफे के बाद अब रिक्त सीट पर आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
आज जारी हो सकती है अधिसूचना
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस्तीफा स्वीकार होने के बाद रिक्त सीट की अधिसूचना जल्द जारी की जा सकती है। इसके बाद दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य बनाए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
एनडीए के भीतर समन्वय का संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम एनडीए सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय और गठबंधन की मजबूती का संकेत माना जा रहा है। दीपक प्रकाश को मंत्री पद पर बनाए रखने के लिए सहयोगी दल के हितों को प्राथमिकता देना इस फैसले की बड़ी वजह माना जा रहा है।
दूसरी बार भी मंत्री बने थे दीपक प्रकाश
2025 के विधानसभा चुनाव के बाद बनी सरकार में दीपक प्रकाश को पहली बार मंत्री बनाया गया था। बाद में सरकार में नेतृत्व परिवर्तन के दौरान जब नई कैबिनेट का गठन हुआ, तब भी उन्हें दोबारा पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। अब उनका मंत्री पद सुरक्षित रखने के लिए उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
यह भी पढ़ें: अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद
इस घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व
बिहार की राजनीति में यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे गठबंधन राजनीति में सहयोगी दलों के बीच तालमेल और सत्ता संतुलन बनाए रखने की रणनीति स्पष्ट होती है। आने वाले दिनों में विधान परिषद की रिक्त सीट पर होने वाली प्रक्रिया और दीपक प्रकाश की सदस्यता पर सभी की नजर रहेगी।








