दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। रेस्क्यू टीम ने मलबे से एक और शव बरामद किया है। बताया जा रहा है कि मृतक बेसमेंट में काम कर रहा मजदूर था। घटना के बाद राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ पुलिस की जांच भी तेज कर दी गई है।
पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि इमारत के बेसमेंट में चल रहे निर्माण कार्य के कारण उसकी नींव प्रभावित हुई और इसी वजह से इमारत ढह गई। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
बिल्डिंग मालिक की तलाश में 10 टीमें गठित
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम की तलाश के लिए 10 अलग-अलग टीमें बनाई हैं। इन टीमों में स्थानीय जिला पुलिस, स्पेशल स्टाफ और अन्य ऑपरेशनल यूनिट के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, प्रत्येक टीम की निगरानी एडिशनल DCP स्तर के अधिकारी द्वारा की जा रही है। आरोपी की तलाश में दिल्ली के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी संभावित ठिकानों पर कार्रवाई की जा रही है।
दिल्ली हाई कोर्ट में आज होगी सुनवाई
सत्य निकेतन में इमारत गिरने का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट भी पहुंच गया है। सोमवार, 7 सितंबर को एक वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के समक्ष इस घटना का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की।
घटना की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस ने मामले की सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। कोर्ट में हादसे से जुड़े राहत, सुरक्षा और प्रशासनिक पहलुओं पर आगे क्या दिशा तय होती है, इस पर नजर रहेगी।
प्रभावित लोगों के लिए कॉलेज हॉस्टल में रहने की व्यवस्था
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इमारत से सुरक्षित निकाले गए लोगों के रहने के लिए कॉलेज हॉस्टलों में व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार प्रभावित लोगों की आवश्यकताओं का ध्यान रख रही है। हादसे से प्रभावित छात्रों के माता-पिता से भी संपर्क किया जा रहा है और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
LG ने बुलाई सभी एजेंसियों की बैठक
सत्य निकेतन हादसे को लेकर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भी उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ DDA, MCD और दिल्ली पुलिस समेत संबंधित विभागों और एजेंसियों के अधिकारी शामिल होंगे।
बैठक दोपहर बाद प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इसमें हादसे की जांच, अवैध या असुरक्षित निर्माण पर कार्रवाई, राहत व्यवस्था और राजधानी में इमारतों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।
अब जांच के साथ जिम्मेदारी तय करने पर जोर
सत्य निकेतन हादसे के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती घटना की परिस्थितियों की विस्तृत जांच और जिम्मेदारी तय करना है। बेसमेंट में निर्माण कार्य और इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा के बीच संबंध की भी जांच की जा रही है।
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पुलिस की कार्रवाई के साथ हाई कोर्ट की सुनवाई और उपराज्यपाल की बैठक से इस मामले में आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।









