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FIDE का बड़ा फैसला: क्लासिकल शतरंज में कम समय के मुकाबलों को मंजूरी 

FIDE महासभा ने छोटे टाइम कंट्रोल के प्रस्ताव का समर्थन किया। 60+30 सामान्य विकल्प बन सकता है, जबकि 45+30 और एक दिन में तीन मुकाबलों पर आगे चर्चा होगी।

Gautam Rishi by Gautam Rishi
13 October 2026
in खेल
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FIDE का बड़ा फैसला: क्लासिकल शतरंज में कम समय के मुकाबलों को मंजूरी - Panchayati Times

FIDE

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FIDE की महासभा ने क्लासिकल शतरंज में कम समय सीमा वाले मुकाबलों को बढ़ावा देने से जुड़े प्रस्ताव का समर्थन किया है। यह प्रस्ताव आइसलैंड शतरंज महासंघ की ओर से रखा गया था। हालांकि, प्रस्ताव को मंजूरी मिलने का मतलब यह नहीं है कि नियम तुरंत बदल गए हैं। अब FIDE काउंसिल इसके क्रियान्वयन के लिए नियमों का ढांचा तैयार करेगी।

प्रस्तावित बदलावों के तहत 60 मिनट के साथ प्रत्येक चाल पर 30 सेकंड (60+30) का टाइम कंट्रोल सामान्य रूप से इस्तेमाल किया जा सकेगा। कुछ निर्धारित परिस्थितियों में 45 मिनट और प्रत्येक चाल पर 30 सेकंड (45+30) के प्रारूप को भी अनुमति देने की योजना है। वहीं, खिताब और नॉर्म हासिल करने वाले टूर्नामेंट में एक दिन में अधिकतम दो मुकाबलों की सीमा बरकरार रखने का प्रस्ताव है।

FIDE महासभा में प्रस्ताव को 33 वोटों का समर्थन

आइसलैंड शतरंज महासंघ ने क्लासिकल चेस के नियमों में दो प्रमुख बदलावों का सुझाव दिया था। पहला, 45+30 टाइम कंट्रोल को सामान्य विकल्प बनाया जाए, जिसके लिए अलग से अनुमति लेने की जरूरत न हो। दूसरा, खिलाड़ियों को एक दिन में तीन मुकाबले खेलने की छूट दी जाए।

FIDE की क्वालिफिकेशन कमीशन ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया था। इसके बजाय FIDE काउंसिल ने बीच का रास्ता सुझाया। काउंसिल के अनुसार, 60+30 को सामान्य टाइम कंट्रोल बनाया जाना चाहिए, जबकि 45+30 को कुछ विशेष श्रेणियों के टूर्नामेंट तक सीमित रखा जा सकता है।

इसके बावजूद FIDE महासभा में आइसलैंड महासंघ के प्रस्ताव को 33 वोट मिले और इसे औपचारिक समर्थन प्राप्त हुआ। हालांकि, नियमों में वास्तविक बदलाव लागू करने के लिए FIDE काउंसिल को आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

60+30 टाइम कंट्रोल के लिए नहीं लेनी होगी विशेष अनुमति

परंपरागत रूप से उच्चस्तरीय क्लासिकल चेस टूर्नामेंट में एक मुकाबले के लिए 90 मिनट और प्रत्येक चाल पर 30 सेकंड का अतिरिक्त समय यानी 90+30 टाइम कंट्रोल इस्तेमाल किया जाता रहा है।

FIDE ने 2026 में एक साल की पायलट योजना शुरू की थी। इसके तहत क्वालिफिकेशन कमीशन की अनुमति से कुछ टूर्नामेंट में 60+30 और विशेष परिस्थितियों में 45+30 टाइम कंट्रोल का इस्तेमाल किया जा सकता था। इन प्रारूपों में खेले गए मुकाबलों को भी क्लासिकल रेटिंग के लिए मान्यता मिल सकती थी।

अब FIDE काउंसिल 60+30 को सामान्य रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार, टूर्नामेंट आयोजकों को इस प्रारूप के लिए क्वालिफिकेशन कमीशन या किसी अन्य निकाय से अलग मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

इस बदलाव से टूर्नामेंट आयोजित करने में लगने वाला समय और खर्च कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, खिलाड़ियों और आयोजकों के लिए क्लासिकल प्रतियोगिताओं का आयोजन अधिक व्यावहारिक हो सकता है।

किन टूर्नामेंट में लागू हो सकता है 45+30 का प्रारूप?

FIDE काउंसिल ने 45+30 टाइम कंट्रोल को भी कुछ श्रेणियों में बिना अलग अनुमति के लागू करने का प्रस्ताव रखा है।

1. FIDE सर्किट के टूर्नामेंट: FIDE सर्किट में शामिल और निर्धारित शर्तें पूरी करने वाली प्रतियोगिताओं में 45+30 को स्वतः अनुमति देने की योजना है। इन टूर्नामेंट में आमतौर पर अनुभवी और पेशेवर खिलाड़ी भाग लेते हैं। हालांकि, आयोजकों को खिलाड़ियों की राय और प्रतियोगिता की परिस्थितियों पर भी विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

2. 2400 से कम रेटिंग वाले खिलाड़ियों के टूर्नामेंट: ऐसे टूर्नामेंट, जिनमें किसी भी खिलाड़ी की रेटिंग 2400 या उससे अधिक नहीं है, उनमें भी 45+30 प्रारूप को स्वतः अनुमति देने का प्रस्ताव है। इस श्रेणी के टूर्नामेंट में मौजूदा व्यवस्था के तहत 60+30 का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इन दोनों परिस्थितियों में अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता समाप्त करने का प्रस्ताव है। हालांकि, यह व्यवस्था तब लागू होगी जब संबंधित नियमों में औपचारिक बदलाव मंजूर हो जाएंगे।

खिताब और नॉर्म के लिए एक दिन में दो मुकाबलों की सीमा बरकरार

FIDE के प्रस्ताव में एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि खिताब और नॉर्म के लिए गिने जाने वाले टूर्नामेंट में एक दिन में दो से अधिक मुकाबले खेलने की अनुमति नहीं होगी।

यहां दो तरह के नियमों के बीच अंतर समझना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय खिताब और नॉर्म के लिए एक दिन में अधिकतम दो मुकाबलों की सीमा लागू होती है। इसके पीछे तर्क यह है कि क्लासिकल शतरंज में खिलाड़ियों को गहन विचार और सटीक निर्णय लेने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।

वहीं, केवल रेटिंग के उद्देश्य से खेले जाने वाले मुकाबलों के लिए नियम अलग हैं। इस श्रेणी में एक दिन में कुल 12 घंटे तक खेल की सीमा के भीतर दो से अधिक मुकाबले भी खेले जा सकते हैं।

इस तरह, दो मुकाबलों की सीमा सभी रेटिंग मैचों पर समान रूप से लागू नहीं होती। इसका मुख्य संबंध उन प्रतियोगिताओं से है, जिनके परिणामों के आधार पर खिलाड़ियों को खिताब और नॉर्म मिल सकते हैं।

छोटे टाइम कंट्रोल में नॉर्म हासिल करने के नियमों की भी होगी समीक्षा

FIDE काउंसिल ने क्वालिफिकेशन कमीशन से सीधे अंतरराष्ट्रीय खिताब प्रदान करने वाले टूर्नामेंट यानी Direct Titles की शर्तों की समीक्षा करने को भी कहा है।

इसका कारण यह चिंता है कि कम समय वाले प्रारूप में नॉर्म हासिल करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। उदाहरण के लिए, 45+30 में प्राप्त नॉर्म और 90+30 में प्राप्त नॉर्म को खेल की गुणवत्ता के लिहाज से समान मानना उचित है या नहीं, इस पर विचार किया जाएगा।

कमीशन टूर्नामेंट में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की न्यूनतम रेटिंग, प्रतिभागियों की संख्या और छोटे टाइम कंट्रोल में हासिल किए गए नॉर्म के मूल्यांकन जैसे पहलुओं की समीक्षा कर सकता है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शतरंज खिताबों की प्रतिष्ठा और मानकों को बनाए रखना है।

2026 के अंत तक हो सकता है अंतिम निर्णय

FIDE काउंसिल ने कहा है कि महासभा के प्रस्ताव को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। निकट भविष्य में 60+30 को सामान्य क्लासिकल टाइम कंट्रोल बनाने के लिए औपचारिक संशोधन को मंजूरी देने की योजना है।

अन्य प्रस्तावित बदलावों पर क्वालिफिकेशन कमीशन से पक्ष और विपक्ष में तर्क प्रस्तुत करने को कहा जाएगा। FIDE इन सामग्रियों को सार्वजनिक करने और शतरंज समुदाय के संबंधित पक्षों से सुझाव आमंत्रित करने की योजना बना रहा है।

इसके बाद प्रस्तावों पर सार्वजनिक चर्चा हो सकती है और अंतिम निर्णय के लिए इन्हें 2026 के अंत में संभावित विशेष ऑनलाइन महासभा के सामने रखा जा सकता है। 45+30 के व्यापक इस्तेमाल और एक दिन में तीन मुकाबलों की अनुमति पर अंतिम फैसला इसी परामर्श प्रक्रिया के बाद लिया जाएगा।

क्लासिकल शतरंज में समय घटाने की जरूरत क्यों महसूस हुई?

आज की तेज रफ्तार जीवनशैली और शतरंज की बदलती तैयारी पद्धतियों के कारण छोटे प्रारूपों की मांग बढ़ रही है। कंप्यूटर आधारित विश्लेषण और आधुनिक प्रशिक्षण ने खिलाड़ियों की तैयारी का तरीका भी बदल दिया है। इसके साथ ही, आयोजक ऐसी प्रतियोगिताएं चाहते हैं जिन्हें कम दिनों में पूरा किया जा सके।

छोटे टाइम कंट्रोल और एक दिन में दो मुकाबलों के प्रारूप से किसी क्लासिकल टूर्नामेंट को नौ दिन के बजाय पांच या छह दिनों में पूरा करना संभव हो सकता है। इससे आयोजन की लागत, खिलाड़ियों के ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े खर्च कम हो सकते हैं।

हालांकि, समय बहुत कम कर देने से क्लासिकल शतरंज की मूल विशेषता प्रभावित होने का जोखिम भी है। इस प्रारूप में खिलाड़ियों को चालों का गहराई से विश्लेषण करने और सोच-समझकर निर्णय लेने का पर्याप्त समय मिलना चाहिए।

यह भी पढ़ें: Asian Games में खराब प्रदर्शन पर 9 खेल महासंघों से जवाब-तलब की तैयारी 

इसीलिए FIDE के सामने चुनौती यह है कि टूर्नामेंट को अधिक किफायती और व्यावहारिक बनाने के साथ क्लासिकल शतरंज की गुणवत्ता और प्रतिष्ठा को भी बरकरार रखा जाए।

Tags: 45+30 शतरंजFIDE Chess RulesFIDE CouncilFIDE महासभाआइसलैंड शतरंज महासंघक्लासिकल शतरंजशतरंज नियम 2026
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