Asian Games 2026: भारत के कई खेलों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं होने के बाद खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) की समीक्षा करने की तैयारी की है। 15 अक्टूबर को होने वाली बैठक में कम पदक जीतने वाले महासंघों से उनके प्रदर्शन, खिलाड़ियों की तैयारी और उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल पूछे जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम नौ महासंघों को मंत्रालय की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। इसका असर लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 की तैयारियों के लिए मिलने वाली फंडिंग पर भी पड़ सकता है।
15 अक्टूबर को खेल महासंघों के प्रदर्शन की समीक्षा
राष्ट्रीय खेल महासंघों के साथ मंत्रालय की समीक्षा बैठक पहले निर्धारित तारीख से आगे बढ़ाकर 15 अक्टूबर कर दी गई है। इसी दिन कुछ महासंघों और खिलाड़ियों को प्रधानमंत्री के सामने अपनी उपलब्धियों और कामकाज का ब्योरा रखने का अवसर भी मिल सकता है।
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि कम से कम नौ महासंघों से उनके प्रदर्शन को लेकर जवाब मांगा जा सकता है। मंत्रालय का जोर ऐसे खिलाड़ियों और खेलों पर है, जिनसे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने की उम्मीद हो।
सूत्र के मुताबिक, सरकार अब यह आकलन करना चाहती है कि जिन खेलों को पर्याप्त सरकारी सहायता मिल रही है, वे उस निवेश के अनुरूप नतीजे क्यों नहीं दे पा रहे हैं। समीक्षा के दौरान प्रदर्शन के साथ-साथ भविष्य की योजना और उपलब्ध संसाधनों के उपयोग पर भी ध्यान दिए जाने की संभावना है।
एशियाई खेलों में भारत ने जीते 85 पदक
आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारत ने 36 खेलों में 503 खिलाड़ियों का दल भेजा था। भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 85 पदक जीते, जिनमें 21 स्वर्ण पदक शामिल थे। इस प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा।
हालांकि, कुल पदकों और स्वर्ण पदकों की उपलब्धि के बावजूद कई खेल ऐसे रहे, जिनमें भारतीय दल पदक जीतने में सफल नहीं हुआ। इससे खिलाड़ियों के चयन, प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं की तैयारी और महासंघों की रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, रोइंग में 22 सदस्यीय दल केवल एक कांस्य पदक जीत सका। तलवारबाजी में 20 खिलाड़ियों का दल खाली हाथ लौटा, जबकि बैडमिंटन के 20 सदस्यीय दल को एक कांस्य पदक मिला। कैनोइंग, ई-स्पोर्ट्स, साइक्लिंग, तैराकी और टेनिस में भारत को पदक नहीं मिला। टेबल टेनिस में मिश्रित युगल स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल हुआ।
बैडमिंटन टीम पर खर्च और नतीजों को लेकर सवाल
बैडमिंटन में भारत की तैयारियों और प्रदर्शन का मामला समीक्षा के दौरान चर्चा में आ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जापान में 20 सदस्यीय भारतीय बैडमिंटन दल को नागोया के पांच सितारा नागोया टोक्यू होटल में ठहराया गया था। यहां एक रात के कमरे का किराया लगभग 13,729 रुपये बताया गया है।
इसके विपरीत, कुछ अन्य देशों और खेलों के खिलाड़ियों ने खेल गांव या क्रूज जहाज पर ठहरने जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया। भारतीय बैडमिंटन दल को बेहतर सुविधाएं मिलने के बावजूद टीम केवल पुरुष टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीत सकी।
पुरुष टीम ने राउंड ऑफ 16 में बांग्लादेश को 3-0 से हराया था। हालांकि, महीने की शुरुआत में विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाली भारतीय महिला युगल जोड़ी समेत अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा।
भारतीय खिलाड़ियों को आयोजन स्थल तक पहुंचने के दौरान परिवहन संबंधी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। पीवी सिंधु को 24 घंटे के भीतर तीन मुकाबले खेलने पड़े, जिससे मैचों के कार्यक्रम और खिलाड़ियों की रिकवरी को लेकर सवाल उठे। हालांकि, ऐसी परेशानियां केवल भारतीय दल तक सीमित नहीं थीं।
इसलिए समीक्षा का मुद्दा सिर्फ पदकों की संख्या नहीं, बल्कि यह भी होगा कि खिलाड़ियों को मिली सुविधाओं, तैयारी और प्रतियोगिता के दौरान की परिस्थितियों का उनके प्रदर्शन पर कितना असर पड़ा।
मंत्रालय का संदेश: सरकारी फंडिंग के साथ नतीजे भी जरूरी
एशियाई खेलों से पहले भारतीय दल के प्रमुख साहदेव यादव ने कहा था कि मंत्रालय ने खिलाड़ियों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त खर्च करने की अनुमति दी है। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर माहौल देना था, ताकि वे प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।
अब मंत्रालय की समीक्षा में यह देखा जा सकता है कि उपलब्ध कराई गई सुविधाओं और सरकारी निवेश के बदले महासंघों ने किस तरह के परिणाम हासिल किए। जिन खेलों को ओलंपिक चक्र के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है, उनसे बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा की जा रही है।
हर पदक जीतने के पीछे खिलाड़ियों की मेहनत और तैयारी की कहानी होती है। इसी तरह, पदक से चूकने के कारणों को भी समझना जरूरी है। समीक्षा के दौरान प्रदर्शन से जुड़ी परिस्थितियों का आकलन करने के साथ भविष्य की योजनाओं और फंडिंग के फैसलों पर विचार किया जा सकता है।
LA 2028 ओलंपिक के लिए फंडिंग पर नजर
एशियाई खेलों के बाद अब सरकार का ध्यान लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 की तैयारियों पर है। रिपोर्ट के अनुसार, बैडमिंटन महासंघ को संकेत दिया गया है कि मौजूदा फंडिंग चक्र एशियाई खेलों तक केंद्रित था। आगे की सहायता के लिए बेहतर योजना और प्रदर्शन की दिशा दिखानी होगी।
इसका मतलब है कि महासंघों को अब केवल खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भेजने तक सीमित नहीं रहना होगा। उन्हें प्रशिक्षण, कोचिंग, अंतरराष्ट्रीय अनुभव, खिलाड़ियों की तैयारी और पदक जीतने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ठोस योजना प्रस्तुत करनी पड़ सकती है।
पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत ने छह पदक जीते थे, जिनमें एक रजत और पांच कांस्य पदक शामिल थे। इसके अलावा भारतीय खिलाड़ी छह स्पर्धाओं में चौथे स्थान पर रहे थे। इन नतीजों के बाद LA 2028 के लिए पदकों की संख्या बढ़ाने की चुनौती भी बनी हुई है।
ईस्पोर्ट्स में भारत का निराशाजनक प्रदर्शन, एक भी पदक नहीं
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय ईस्पोर्ट्स टीम का अभियान बिना किसी पदक के समाप्त हो गया। भारत के 15 सदस्यीय दल ने ईफुटबॉल, पुयो पुयो चैंपियंस, पोकेमॉन यूनाइट और लीग ऑफ लीजेंड्स सहित चार पदक स्पर्धाओं में हिस्सा लिया, लेकिन टीम किसी भी इवेंट में पदक तक नहीं पहुंच सकी।
अब महासंघों को प्रदर्शन और योजना दोनों दिखानी होंगी
खेल मंत्रालय की प्रस्तावित समीक्षा भारतीय खेल व्यवस्था के लिए अहम साबित हो सकती है। अगर फंडिंग को प्रदर्शन और भविष्य की योजना से जोड़ा जाता है, तो महासंघों पर जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि खिलाड़ियों को समय पर प्रशिक्षण, योग्य कोच, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव और जरूरी तकनीकी सहायता मिले।
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आखिरकार, अंतरराष्ट्रीय खेलों में सफलता केवल खिलाड़ियों की मेहनत पर निर्भर नहीं करती। चयन प्रक्रिया, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, योजना, सुविधाएं और महासंघों का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 15 अक्टूबर की समीक्षा में इन सभी पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है। इससे यह तय करने में मदद मिल सकती है कि LA 2028 की तैयारियों के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह अधिक प्रभावी बनाया जाए।








