कंबोज ने न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। उनके 10 ओवर के स्पेल में दो मेडन ओवर भी शामिल रहे। उन्होंने कुल 46 गेंदें डॉट फेंकीं। दूसरी ओर, अर्शदीप सिंह ने भी शानदार गेंदबाजी करते हुए चार विकेट अपने नाम किए। भारतीय गेंदबाजों के सामूहिक प्रदर्शन के सामने न्यूजीलैंड की टीम 40.2 ओवर में 185 रन पर सिमट गई।
21 साल में पहली बार भारतीय गेंदबाजों के खास क्लब में शामिल हुए कंबोज
अंशुल कंबोज का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास है, क्योंकि साल 2005 के बाद किसी भारतीय तेज गेंदबाज ने वनडे पारी में अपने पूरे 10 ओवर का कोटा पूरा करते हुए 2.20 की इकोनॉमी से बेहतर प्रदर्शन नहीं किया है। कंबोज ने 10 ओवर में 22 रन देकर इस सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया।
इससे पहले आशीष नेहरा, अजीत अगरकर और जसप्रीत बुमराह भी वनडे क्रिकेट में पूरे 10 ओवर गेंदबाजी करते हुए 2.20 की इकोनॉमी दर्ज कर चुके हैं। कंबोज अब इस उपलब्धि को हासिल करने वाले चौथे भारतीय तेज गेंदबाज बन गए हैं।
पूरे 10 ओवर गेंदबाजी करते हुए भारत के किफायती गेंदबाजी स्पेल (2005 के बाद):
| गेंदबाज | गेंदबाजी प्रदर्शन | इकोनॉमी | वर्ष |
|---|---|---|---|
| आशीष नेहरा | 10 ओवर, 22 रन, 2 विकेट | 2.20 | 2005 |
| अजीत अगरकर | 10 ओवर, 22 रन, 2 विकेट | 2.20 | 2006 |
| जसप्रीत बुमराह | 10 ओवर, 22 रन, 4 विकेट | 2.20 | 2016 |
| अंशुल कंबोज | 10 ओवर, 22 रन, 2 विकेट | 2.20 | 2026 |
इस सूची में जसप्रीत बुमराह का प्रदर्शन सबसे अधिक विकेट लेने के लिहाज से खास रहा था। उन्होंने 2016 में जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे में 10 ओवर में 22 रन देकर चार विकेट हासिल किए थे। वहीं, कंबोज ने न्यूजीलैंड के खिलाफ दो विकेट लेकर अपनी किफायती गेंदबाजी से टीम को अहम योगदान दिया।
सटीक लाइन-लेंथ से न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों पर बनाया दबाव
अंशुल कंबोज ने न्यूजीलैंड की पारी के दौरान लगातार अनुशासित गेंदबाजी की। उन्होंने अपनी गेंदों की गति और लेंथ में ज्यादा बदलाव किए बिना बल्लेबाजों को रन बनाने के लिए संघर्ष करने पर मजबूर किया। कंबोज ने मिचेल सैंटनर और नाथन स्मिथ को पवेलियन भेजा।
सैंटनर 16 गेंदों में चार रन बनाकर कंबोज की गेंद पर बोल्ड हुए। इसके बाद नाथन स्मिथ एक रन बनाकर आउट हुए। कंबोज की गेंद पर उनका कैच विराट कोहली ने पकड़ा। इन दोनों विकेटों के साथ उन्होंने न्यूजीलैंड की पारी पर भारतीय गेंदबाजों का दबाव और बढ़ा दिया।
इस मुकाबले में अर्शदीप सिंह ने चार विकेट हासिल किए, जबकि गूरनूर बराड़ ने भी तीन बल्लेबाजों को आउट किया। कंबोज के दो विकेटों ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती दी। पूरी टीम के संयुक्त प्रयास से न्यूजीलैंड बड़ा स्कोर खड़ा करने में नाकाम रही।
वनडे डेब्यू में महंगे साबित हुए थे अंशुल कंबोज
अंशुल कंबोज के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सफर अब तक उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने इसी साल वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया था। अपने पहले मुकाबले में वह प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं रहे और नौ ओवर में 82 रन खर्च कर दिए थे। हालांकि, न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में उन्होंने अपने प्रदर्शन से उस निराशा को पीछे छोड़ने का संकेत दिया।
विदेशी परिस्थितियों में यह उनका प्रभावशाली प्रदर्शन रहा। न्यूजीलैंड की पिच पर उन्होंने जिस तरह से गेंदबाजी की, उससे उनकी क्षमता और धैर्य दोनों दिखाई दिए। खास बात यह रही कि उन्होंने केवल विकेट लेने पर ध्यान देने के बजाय रन रोकने की रणनीति अपनाई और विपक्षी बल्लेबाजों को लगातार दबाव में रखा।
घरेलू क्रिकेट में भी प्रभावशाली रहा है प्रदर्शन
अंशुल कंबोज ने घरेलू क्रिकेट में भी अपनी गेंदबाजी से पहचान बनाई है। उनके लिस्ट-ए करियर के आंकड़ों के मुताबिक, उन्होंने 36 मैचों में 56 विकेट हासिल किए हैं। उनकी गेंदबाजी की सबसे बड़ी ताकत लगातार एक ही लाइन और लेंथ पर गेंद डालने की क्षमता मानी जाती है।
कंबोज के पास भले ही हर गेंद पर अत्यधिक गति हासिल करने की क्षमता न हो, लेकिन वह लंबे स्पेल में अनुशासन बनाए रख सकते हैं। सीमित ओवरों के क्रिकेट में यह गुण काफी अहम होता है, क्योंकि बल्लेबाजों को तेजी से रन बनाने के लिए मजबूर करने के बजाय उन्हें लगातार दबाव में रखना भी विकेट हासिल करने का प्रभावी तरीका है।
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न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में कंबोज ने इसी क्षमता का प्रदर्शन किया। 10 ओवर में सिर्फ 22 रन देना और दो विकेट हासिल करना उनके आत्मविश्वास के लिए भी अहम साबित हो सकता है। अब उनके सामने इस प्रदर्शन को आगे के मुकाबलों में बरकरार रखने की चुनौती होगी।








