कैबिनेट के फैसलों की जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। अग्निवीरों से जुड़े फैसले को सैन्य सेवा में उनके योगदान और अनुभव को आगे भी इस्तेमाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अलावा कैबिनेट ने देश में ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए 92 गीगावॉट-घंटे (GWh) की ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज योजना और दुष्कर्म तथा बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए 850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों को मजबूत करने और उनका विस्तार करने की मंजूरी दी।
अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव, 75 प्रतिशत अग्निवीरों को मिलेगा अतिरिक्त कार्यकाल
अग्निपथ योजना के तहत वर्ष 2022 में भर्ती शुरू हुई थी। इस व्यवस्था में अग्निवीरों को चार साल के लिए सशस्त्र बलों में सेवा का अवसर दिया गया। मूल प्रावधान के अनुसार, चार साल की अवधि पूरी होने के बाद अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को योग्यता और मेरिट के आधार पर नियमित कैडर में शामिल किया जा सकता था। शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को सेवा पूरी होने के बाद नागरिक जीवन में लौटना था।
अब सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा कार्यकाल देने का फैसला किया है। सीडीएस जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि के अनुसार, इस अतिरिक्त अवधि के बाद जो अग्निवीर सशस्त्र बलों में बने रहना चाहेंगे, उन्हें नियमित सेवा में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। हालांकि, इसके लिए चयन निर्धारित वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर होगा।
इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि सभी 75 प्रतिशत अग्निवीर स्वतः नियमित सैनिक बन जाएंगे। उन्हें पहले दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर मिलेगा और उसके बाद चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा। मूल व्यवस्था के तहत 25 प्रतिशत अग्निवीरों का नियमित कैडर में चयन पहले की तरह मेरिट के आधार पर होगा।
पहले बैच की चार साल की सेवा अवधि हो रही पूरी
अग्निवीरों को लेकर यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच की चार साल की सेवा अवधि पूरी होने वाली है। वर्ष 2022 में शुरू हुई इस योजना के पहले बैच के अग्निवीरों के सामने अब सेवा समाप्त होने और आगे के करियर को लेकर सवाल थे।
सीडीएस ने बताया कि पिछले चार वर्षों में अग्निवीरों के प्रदर्शन का लगातार मूल्यांकन किया गया है। उनके काम और योगदान को लेकर मिले फीडबैक को सकारात्मक बताया गया है। इसी अनुभव के आधार पर सरकार ने अतिरिक्त सेवा अवधि का विकल्प उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
दो साल के इस अतिरिक्त कार्यकाल में अग्निवीरों को पहले की तुलना में बेहतर पारिश्रमिक और सेवा निधि से जुड़े अधिक लाभ दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इस बदलाव से उन्हें सैन्य सेवा में अपना अनुभव बढ़ाने और नियमित सशस्त्र बलों में चयन का एक और अवसर प्राप्त होगा।
92 GWh की ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज योजना को मंजूरी
कैबिनेट ने स्वच्छ ऊर्जा और बिजली व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने देशभर में 92 GWh की ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज क्षमता विकसित करने की योजना को मंजूरी दी है। इसके लिए लगभग 14,500 करोड़ रुपये की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding-VGF) योजना को स्वीकृति दी गई है।
इस योजना के तहत ऊर्जा भंडारण के लिए अलग-अलग तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रस्तावित क्षमता में 30 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, 60 GWh पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं और 2 GWh उभरती हुई ऊर्जा भंडारण तकनीकों के लिए निर्धारित किए गए हैं। योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू करने का प्रस्ताव है।
नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, खासकर सौर और पवन ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ने के साथ बिजली के उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है। सौर ऊर्जा का उत्पादन दिन के समय अधिक होता है, जबकि बिजली की मांग कई बार शाम और रात के समय भी ऊंची रहती है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणालियां अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित रखने और जरूरत के समय ग्रिड में उपलब्ध कराने में मदद करती हैं।
बैटरी स्टोरेज और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज जैसी तकनीकों के विस्तार से बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल सकती है। सरकार की योजना इस क्षमता को देश के अलग-अलग हिस्सों में विकसित करने की है।
850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों को मजबूत करने का फैसला
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने 850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों (Fast Track Special Courts-FTSCs) को जारी रखने, मजबूत करने और उनके विस्तार को मंजूरी दी है। इनमें बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो (POCSO) के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें भी शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अपराधों के मामलों में सख्त और निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनों का प्रभावी इस्तेमाल करने के साथ जरूरत पड़ने पर नए कानून बनाने और उनके बेहतर क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जाएगा।
फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की व्यवस्था का उद्देश्य दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज लंबित मामलों की सुनवाई निर्धारित समय में पूरी करना है। इन अदालतों के माध्यम से पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने और गंभीर अपराधों से जुड़े मुकदमों के निपटारे में तेजी लाने का प्रयास किया जाता है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, 850 अदालतों को मजबूत करने और उनका विस्तार करने का फैसला महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को गति देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ऊर्जा, सुरक्षा और सैन्य सेवाओं पर सरकार का जोर
केंद्रीय कैबिनेट के इन फैसलों में तीन प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिखाई देता है। अग्निवीरों को अतिरिक्त सेवा अवधि देने का निर्णय सैन्य बलों में उनके अनुभव का उपयोग करने और नियमित सेवा में आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराने से जुड़ा है। वहीं, 92 GWh की ऊर्जा भंडारण योजना देश की बिजली व्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।
इसके साथ ही 850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों को मजबूत करने की मंजूरी महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय की व्यवस्था को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
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इन फैसलों के प्रभावी क्रियान्वयन पर इनकी सफलता निर्भर करेगी। खासकर अग्निवीरों के लिए चयन प्रक्रिया, अतिरिक्त कार्यकाल की शर्तें और सेवा लाभ स्पष्ट होने से इस व्यवस्था का लाभ बेहतर तरीके से मिल सकेगा। वहीं, ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं और फास्ट ट्रैक अदालतों के विस्तार से जुड़े लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना भी महत्वपूर्ण होगा।








