इन नियमों के तहत ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर शिकायतों के समाधान के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था बनाई जाएगी। इसके अलावा शिकायतों की जांच, डिजिटल पंजीकरण, ऑनलाइन निगरानी और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।
ग्राम पंचायत से जिला स्तर तक बनेगी शिकायत निवारण व्यवस्था
वीबी-जी राम जी शिकायत निवारण नियम, 2026 के तहत राज्य सरकारों को ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना होगा। प्रत्येक स्तर पर नामित अधिकारी शिकायतें प्राप्त करने, उनका पंजीकरण करने, जांच कराने और समाधान सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे।
वहीं, जिला कार्यक्रम समन्वयक जिला स्तर पर इस पूरी व्यवस्था की निगरानी करेंगे। उनकी जिम्मेदारी होगी कि शिकायतों पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई हो और डिजिटल माध्यम से उनकी प्रगति पर नजर रखी जाए।
ऑनलाइन से लेकर हेल्पलाइन तक, शिकायत दर्ज कराने के कई विकल्प
नए नियमों के तहत योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी किसी भी समस्या को लेकर कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके लिए नागरिकों को कई विकल्प दिए गए हैं।
- संबंधित शिकायत निवारण अधिकारी के पास व्यक्तिगत रूप से शिकायत दर्ज कराना।
- डिलीवरी प्रमाण के साथ स्पीड पोस्ट के जरिए शिकायत भेजना।
- केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत करना।
- टेलीफोन, निर्धारित हेल्पलाइन या राज्य सरकार द्वारा तय अन्य माध्यमों का इस्तेमाल करना।
नियमों के मुताबिक, ग्राम पंचायत, ब्लॉक या जिला स्तर पर भौतिक रूप से प्राप्त शिकायतों को उसी दिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करना होगा। किसी कारण से ऐसा संभव नहीं होने पर अगले कार्य दिवस तक पंजीकरण करना अनिवार्य होगा।
शिकायत दर्ज होने के बाद आवेदक को पावती दी जाएगी। इसमें शिकायत की पंजीकरण संख्या, प्राप्ति की तारीख और संबंधित अधिकारी का पदनाम दर्ज होगा।
खास बात यह है कि शिकायत के प्रारूप, भाषा या किसी प्रक्रियागत कमी के आधार पर अधिकारी शिकायत दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकेंगे। इससे ग्रामीण नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया आसान होगी।
7 दिनों में जांच और 15 दिनों में शिकायत का समाधान जरूरी
शिकायत निवारण नियम, 2026 में मामलों के निपटारे के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है।
नियमों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद नामित अधिकारी को उसकी जांच 7 कार्य दिवसों के भीतर पूरी करनी होगी। जांच के दौरान अधिकारी संबंधित विभागों, कर्मचारियों और प्राधिकारियों से जरूरी रिकॉर्ड, रजिस्टर, दस्तावेज, रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक डेटा मांग सकते हैं।
जरूरत पड़ने पर शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा। यह प्रक्रिया व्यक्तिगत रूप से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पूरी की जा सकती है।
जांच पूरी होने के बाद अधिकारी को निष्कर्ष दर्ज करने और जरूरी सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी। इसके साथ ही प्रत्येक शिकायत का अंतिम निवारण उसकी प्राप्ति की तारीख से 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।
कार्रवाई पूरी होने के बाद जांच के निष्कर्ष और समाधान का विवरण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया जाएगा। शिकायतकर्ता को भी इसकी जानकारी दी जाएगी। ऑफलाइन शिकायत करने वालों को भौतिक माध्यम से भी परिणाम की सूचना उपलब्ध कराई जाएगी।
डिजिटल ट्रैकिंग से शिकायतों पर रहेगी नजर
नए नियमों में शिकायतों की शुरुआत से लेकर अंतिम समाधान तक डिजिटल निगरानी की व्यवस्था की गई है। निर्धारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर शिकायत का पंजीकरण, जांच की स्थिति, निष्कर्ष और की गई कार्रवाई का विवरण दर्ज होगा।
इस व्यवस्था से अधिकारी स्तर पर लंबित मामलों की पहचान करना और शिकायतों के निपटारे की निगरानी करना आसान होगा।
यदि किसी शिकायत का समाधान निर्धारित 15 दिनों के भीतर नहीं होता है, तो उसे राज्य सरकार की शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत अगले उच्च स्तर के अधिकारी या प्राधिकारी के पास भेजा जाएगा। उच्च स्तर पर संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। शिकायत का अंतिम समाधान होने तक उसकी डिजिटल निगरानी जारी रहेगी।
शिकायत निवारण के आदेश के खिलाफ अपील का भी अधिकार
वीबी-जी राम जी शिकायत निवारण नियम, 2026 में अपील की व्यवस्था भी की गई है। इसके तहत शिकायत निवारण प्रक्रिया में पारित आदेशों से असंतुष्ट व्यक्ति अपील कर सकता है।
ऐसी अपील वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की अनुसूची-I में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार दायर और निस्तारित की जाएगी।
ग्रामीण परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
सरकार की ओर से अधिसूचित ये नियम वीबी-जी राम जी योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए एक संस्थागत व्यवस्था तैयार करते हैं। ग्राम पंचायत से जिला स्तर तक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने, शिकायतों का अनिवार्य पंजीकरण करने और निपटारे की समय-सीमा निर्धारित करने से प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही ऑनलाइन और ऑफलाइन शिकायत दर्ज कराने की सुविधा तथा निर्धारित समय में समाधान नहीं होने पर मामले को उच्च स्तर पर भेजने का प्रावधान ग्रामीण नागरिकों के लिए शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाएगा।
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कुल मिलाकर, नए नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले अधिकारों और पात्रता से जुड़े मामलों में शिकायतों की अनदेखी न हो और प्रत्येक शिकायत पर निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई की जाए।









